हर सवाल से पहले इक सवाल होता है
या'नी जाल के अंदर और जाल होता है
दिल बुझा सा रहता है वो अगर नहीं मिलता
जाने उस से मिल कर भी क्यूँ मलाल होता है
सामने वो जब आए ऐसे दिल धड़क जाए
साँस लेते रहना भी फिर मुहाल होता है
तुम भी डूब जाओगे हम भी डूब जाएँगे
सिर्फ़ इश्क़ ही यारो ला - ज़वाल होता है
साँस फूल जाती है लफ़्ज़ तक पहुँचने में
एक शे'र कहने में कैसा हाल होता है
सिर्फ़ दोस्त कहने से दोस्ती नहीं होती
कोई कोई दुनिया में हम ख़याल होता है
— Rizwan malik faani















