Meaning of

शफ़क़

shafaq • شفق

संध्या; गोधूलि; सांझ की लालिमा

twilight; dusk; evening glow

شام; غروب; شام کی لالی

Arabic

माँ की दुआ न बाप की शफ़क़त का साया है आज अपने साथ अपना जनम दिन मनाया है — Anjum Saleemi
किस शफ़क़त में गुँधे हुए मौला माँ बाप दिए कैसी प्यारी रूहों को मेरी औलाद किया — Anjum Saleemi
अब न मिलना "शफ़क़" तू भी उस सेे वो दगा तुझ सेे करने पर भी है — Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
शफ़क़त भुलाया मुफ़्लिसी को देख कर पैसा नहीं है बोलता किस ने कहा — Ganesh gorakhpuri
ये शफ़क़ चाँद सितारे नहीं अच्छे लगते तुम नहीं हो तो नज़ारे नहीं अच्छे लगते — Indira Varma
हक जताती रह गई दुनिया "शफ़क़" चूम कर वो तुझ को जूठा कर गई — Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"
तेरे बदन पर भी शफ़क़ आने लगी तू ही बता अब कौन चाहेगा तुझे — Meem Alif Shaz

शफ़क़ उस क्षण की सुंदरता को दर्शाता है जब दिन और रात एक दूसरे से मिलते हैं। यह क्षणभंगुर सौंदर्य और समय के परिवर्तन का प्रतीक है, जो प्रकाश और अंधकार के बीच के संतुलन को दर्शाता है।

कवि अक्सर शफ़क़ का उपयोग परिवर्तनों की सुंदरता को दर्शाने के लिए करते हैं। यह यात्रा के अंत या आत्मचिंतन की शुरुआत का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द दोपहर की कठोरता या आधी रात की अस्पष्टता के विपरीत है।

शफ़क़ हमें परिवर्तनों की सुंदरता की याद दिलाता है, और हमें बीच के क्षणों में शांति खोजने के लिए प्रेरित करता है।