हर किसी का घर हो रौशन इस दिवालीकोई सूना हो न आँगन इस दिवालीइस दिवाली कोई भूखा भी न सोएसब की थाली में हो भोजन इस दिवालीहर दिया रौशन करे सरहद को जगमगघुस न पाए कोई दुश्मन इस दिवालीघर सजाकर करना स्वागत लक्ष्मी कालक्ष्मी आएगी छन छन इस दिवालीमन लगाकर करना पूजा तुम "शफ़क़" जीफिर पटाख़े होंगे दन दन इस दिवाली— Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"