Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

@sandeep_shafaq

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq" shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"'s shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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  • Nazm

बात कहनी थी ये बस उसी का हूँ मैं
हर घड़ी याद में उसकी रोता हूँ मैं

सुन रही हो इसी भीड़ में वो मुझे
बस इसी आस में गीत गाता हूँ मैं

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

साथ हँसने लगे वो हँसी चाहिए
उम्र भर के लिए बस यही चाहिए

बिन तेरे हो अगर चार दिन ज़िंदगी
एक पल भी नहीं ज़िंदगी चाहिए

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

जिस तरह से निकाले गए आज हम
दर्द अपना कहें तो किसे आज हम

ज़िंदगी के सिखाए थे मतलब जिन्हें
क़त्ल उनके ही हाथों हुए आज हम

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

ज़मीं सर पे उठा लूँगा उस इक लड़की की ख़ातिर मैं
गगन को भी कुचल दूँगा उस इक लड़की की ख़ातिर मैं

भला औक़ात क्या इस चाँद की उस चाँद के आगे
हज़ारों चाँद वारूँगा उस इक लड़की की ख़ातिर मैं

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

अगर जो साथ है तेरा,मुझे किस बात की चिंता
नसीबों से जो है मिलता,है भाई तू वही हीरा

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

गर्व मुझको क्यों न हो ख़ुद पर भला
जन्म क्षत्रिय वंश में मैंने लिया

नाम है संदीप ग़ज़लों में शफ़क़
ग्राम बड़दा है जहाँ माँ नर्मदा

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

ये ग़ुरूर-ए-दौलत टिकता नहीं ज़ियादा दिन
लोग चाहते हैं अब राज हो मुहब्बत का

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

यकीं कर लो इन्हें पढ़ कर तुम्हीं ख़ुद
कही है "मीर" ने दमदार ग़ज़लें

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

कोई घर, घर भी नहीं होता है औरत के बग़ैर
घर को जन्नत भी बना सकती है, चाहे वो अगर

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

बेटे जो भेजे हैं सरहद से बुला लो साहब
कोख माँओं की उजड़ने से बचा लो साहब

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

मुकम्मल ही समझ लो फिर मुझे भी
फ़क़त अब क़त्ल होना रह गया हूँ

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

ये चॉकलेट और फूलों तक तो ठीक भी था
मुझको समझ न आया लेकिन ये भालू का रोल

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

चॉकलेट की दीवानी तो सारी दुनिया है
एक दूध सी गौरी मैम का हूँ मैं आशिक़

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

अपने हिस्से की मोहब्बत बाँट कर ख़ैरात में
चल दिए ख़ैरात में हम फिर मोहब्बत माँगने

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

ज़िंदगी के खाते से इक साल और कम हो गया है
और बधाई दे रहे हैं लोग इक दूजे को इसकी

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

सुनो जानाँ तुम आओ तो दिसंबर तक चली आना
गुज़र जाए न अब की जनवरी भी हिज्र में जानाँ

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

लो फिर दिसंबर आ गया, हाँ फिर दिसंबर आ गया
अगले महीने जनवरी में फिर नया साल आ गया

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

अब ज़रूरी है नहीं मुझको वसाइल कोई
उसकी यादों के सहारे ही जी लूँगा कुछ दिन

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

इमारतों से शहर भर गया है अब
न बच सका कोई भी इंसाँ शहर में

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

काश बढ़ जाए ज़रा सा रात में सर्दी का मौसम
रूठ के सोई है वो,फिर से क़रीब आ जाए शायद

Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"

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