@sandeep_shafaq
Sandeep Singh Chouhan "Shafaq" shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Sandeep Singh Chouhan "Shafaq"'s shayari and don't forget to save your favorite ones.
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बात कहनी थी ये बस उसी का हूँ मैं
हर घड़ी याद में उसकी रोता हूँ मैं
सुन रही हो इसी भीड़ में वो मुझे
बस इसी आस में गीत गाता हूँ मैं
साथ हँसने लगे वो हँसी चाहिए
उम्र भर के लिए बस यही चाहिए
बिन तेरे हो अगर चार दिन ज़िंदगी
एक पल भी नहीं ज़िंदगी चाहिए
जिस तरह से निकाले गए आज हम
दर्द अपना कहें तो किसे आज हम
ज़िंदगी के सिखाए थे मतलब जिन्हें
क़त्ल उनके ही हाथों हुए आज हम
ज़मीं सर पे उठा लूँगा उस इक लड़की की ख़ातिर मैं
गगन को भी कुचल दूँगा उस इक लड़की की ख़ातिर मैं
भला औक़ात क्या इस चाँद की उस चाँद के आगे
हज़ारों चाँद वारूँगा उस इक लड़की की ख़ातिर मैं
अगर जो साथ है तेरा,मुझे किस बात की चिंता
नसीबों से जो है मिलता,है भाई तू वही हीरा
गर्व मुझको क्यों न हो ख़ुद पर भला
जन्म क्षत्रिय वंश में मैंने लिया
नाम है संदीप ग़ज़लों में शफ़क़
ग्राम बड़दा है जहाँ माँ नर्मदा
ये ग़ुरूर-ए-दौलत टिकता नहीं ज़ियादा दिन
लोग चाहते हैं अब राज हो मुहब्बत का
यकीं कर लो इन्हें पढ़ कर तुम्हीं ख़ुद
कही है "मीर" ने दमदार ग़ज़लें
कोई घर, घर भी नहीं होता है औरत के बग़ैर
घर को जन्नत भी बना सकती है, चाहे वो अगर
बेटे जो भेजे हैं सरहद से बुला लो साहब
कोख माँओं की उजड़ने से बचा लो साहब
ये चॉकलेट और फूलों तक तो ठीक भी था
मुझको समझ न आया लेकिन ये भालू का रोल
चॉकलेट की दीवानी तो सारी दुनिया है
एक दूध सी गौरी मैम का हूँ मैं आशिक़
अपने हिस्से की मोहब्बत बाँट कर ख़ैरात में
चल दिए ख़ैरात में हम फिर मोहब्बत माँगने
ज़िंदगी के खाते से इक साल और कम हो गया है
और बधाई दे रहे हैं लोग इक दूजे को इसकी
सुनो जानाँ तुम आओ तो दिसंबर तक चली आना
गुज़र जाए न अब की जनवरी भी हिज्र में जानाँ
लो फिर दिसंबर आ गया, हाँ फिर दिसंबर आ गया
अगले महीने जनवरी में फिर नया साल आ गया
अब ज़रूरी है नहीं मुझको वसाइल कोई
उसकी यादों के सहारे ही जी लूँगा कुछ दिन
काश बढ़ जाए ज़रा सा रात में सर्दी का मौसम
रूठ के सोई है वो,फिर से क़रीब आ जाए शायद