Meaning of

सज्दा

sajda • سجدہ

साष्टांग प्रणाम; झुकने की क्रिया

prostration; act of bowing

سجدہ; جھکنے کا عمل

Arabic

अदावतें कोई नहीं भुला सका लग के गले
हवा का सज्दा भी किया पर आँधियाँ चलती रहीं

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दुनिया कुछ देरी से सजदा करती है
जोगी पहले दिन से जोगी होता हैं

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अब तो उस सूने माथे पर कोरेपन की चादर है
अम्मा जी की सारी सजधज, सब ज़ेवर थे बाबूजी

कभी बड़ा सा हाथ ख़र्च थे कभी हथेली की सूजन
मेरे मन का आधा साहस, आधा डर थे बाबूजी

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ब-जुज़ ख़ुदा के किसी का हम पे करम नहीं है ये कम नहीं है
किसी का सजदा जबीं पे अपनी रक़म नहीं है ये कम नहीं है

हमारी चुप्पी ये है ग़नीमत वगरना ये जो किया है तुम ने
यक़ीन मानो हमारा माथा गरम नहीं है ये कम नहीं है

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ज़िंदगी फ़िरदौस-ए-गुम-गश्ता को पा सकती नहीं
मौत ही आती है ये मंज़िल दिखाने के लिए

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हाँ मैं तो लिए फिरता हूँ इक सजदा-ए-बेताब
उन से भी तो पूछो वो ख़ुदा हैं कि नहीं हैं

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रंग बदला यार ने वो प्यार की बातें गईं
वो मुलाक़ातें गईं वो चाँदनी रातें गईं

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जाने कब ऐसी मुलाक़ातें दुबारा फिर मिलें
खोल कर जी बात कर तेरे लिए ये रात है

पहले आई देर से फिर जाने की भी हड़बड़ी
कुछ तो मेरी बात रख बाहर अभी बरसात है

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हो मुलाक़ातें मोहब्बत में किसी से
मेरा दिल भी यार उलफ़त चाहता है

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है इल्म दुनिया को ज़हरा के चैन जीत गए
अली के नस्ल के सब नूर-ए-ऐन जीत गए

मेरे नबी के नवासे ने ऐसा सज़दा किया
यज़ीद हार गया और हुसैन जीत गए

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अदावतें कोई नहीं भुला सका लग के गले
हवा का सज्दा भी किया पर आँधियाँ चलती रहीं

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दुनिया कुछ देरी से सजदा करती है
जोगी पहले दिन से जोगी होता हैं

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'सज्दा' शब्द गहरी विनम्रता और भक्ति की भावना को वहन करता है। पारंपरिक रूप से, यह श्रद्धा में झुकने की क्रिया को दर्शाता है। कविता में, यह भौतिक क्रिया से परे जाकर प्रेम या एक उच्च शक्ति के प्रति आत्मसमर्पण का प्रतीक बन जाता है।

कवि 'सज्दा' का उपयोग भक्ति की गहराई और आत्मसमर्पण की सुंदरता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर आध्यात्मिक प्रेम या सच्चे स्नेह में पाई जाने वाली विनम्रता की खोज करने वाली कविताओं में प्रकट होता है।

कविता में, 'सज्दा' हृदय की अंतिम भक्ति का प्रतीक बन जाता है।