जाने कब ऐसी मुलाक़ातें दुबारा फिर मिलेंखोल कर जी बात कर तेरे लिए ये रात हैपहले आई देर से फिर जाने की भी हड़बड़ीकुछ तो मेरी बात रख बाहर अभी बरसात है— Rakesh Mahadiuree