Meaning of

सर-ए-आम

sar-e-aam • سر عام

सार्वजनिक रूप से; खुलेआम

in public; openly

عوام میں; کھلے عام

Persian

ये क्या किया कि तुम ने सर-ए-आम कह दिया
मेरे किए हुए को सही काम कह दिया

मैं ने किए हज़ारों करम इस के बावजूद
बदनाम बशर ने मुझे बदनाम कह दिया

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आँसू मैं जब गिराया तो ये काम हो गया
उस बे-वफ़ा का ज़िक्र सर-ए-आम हो गया

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तुम जो चाहो तो सर-ए-आम भी हो सकता है
मसला वरना ये गुमनाम भी हो सकता है

न मैं यूसुफ हूँ न मिस्र के बाज़ार यहाँ
क्या मेरा ख़्वाब यहाँ नीलाम भी हो सकता है

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यूँँ भरी महफ़िल में मेरा नाम न लो
हमारे रिश्ते सर-ए-आम फाश हो जाएँगे

तुम्हें अपना बनाने का चाहत रखने वाले
मेरे साथ तुम्हें देखेंगे तो उदास हो जाएँगे

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मैं सोच के डर जाता हूँ वो तेरे मिरे ख़त
हर शख़्स इन्हें पढ़ जो सर-ए-आम रहा हो

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ये वही हाथ है जो था
में गए
लब वही है ये जो थे चू
में गए

दिल की बस्ती यही थी यारों जहाँ
हम सर-ए-आम कभी लूटे गए

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ये तुम पर रहा कुछ भी अंजाम कर दो
मुझे शोहरतें दो या बदनाम कर दो

दिखा दो मेरे ज़ख़्म सारे जहाँ को
मेरे राज़ सारे सरे-आम कर दो

सरे बज़्म पहलू से लग कर मेरे तुम
इरादे रक़ीबों के नाकाम कर दो

मुझे ले ही आए हो बाज़ार में तो
मेरी हसरतें सारी नीलाम कर दो

मेरी उँगलियाँ अपने होंटों से छू कर
मेरे जिस्म को इश्क़ का जाम कर दो

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ख़ामख़ा ही तुझे मैं छुपाता रहा
दौर ये चल रहा है सर-ए-आम का

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है क़ुबूल तुम को भरना सर-ए-आम बाहों में पर
है ये शर्त फिर कभी तुम न मिलोगी आइने से

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आशिक़ चोरी छुपके पहनाते है पायल अपनी महबूबा को
जान-ए-जानाँ तुझे सर-ए-आम ख़ानदानी कंगन पहनाने हैं

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ये क्या किया कि तुम ने सर-ए-आम कह दिया
मेरे किए हुए को सही काम कह दिया

मैं ने किए हज़ारों करम इस के बावजूद
बदनाम बशर ने मुझे बदनाम कह दिया

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आँसू मैं जब गिराया तो ये काम हो गया
उस बे-वफ़ा का ज़िक्र सर-ए-आम हो गया

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‘सर-ए-आम’ वाक्यांश एक ऐसी छवि उत्पन्न करता है जहाँ सब कुछ सबके सामने खुला होता है, बिना किसी रहस्य के आवरण के। कविता में, यह अक्सर भेद्यता और अनावरण का भार वहन करता है, जहाँ दिल की सच्चाइयाँ दुनिया के सामने प्रकट होती हैं।

कवि 'सर-ए-आम' का उपयोग भावनाओं की नग्नता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रेम या दुःख की सार्वजनिक घोषणाओं को दर्शा सकता है। यह छिपी या निजी भावनाओं के विपरीत है, खुलेपन पर जोर देता है।

कविता के क्षेत्र में, 'सर-ए-आम' पाठक को असुरक्षित दिल का साक्षी बनने के लिए आमंत्रित करता है। यह पारदर्शिता को अपनाने का आह्वान है।