Meaning of

आब-ए

aab-e • آب

पानी; सार

water; essence

پانی; جوہر

Persian

मैं ने आबाद किए कितने ही वीराने 'हफ़ीज़'
ज़िंदगी मेरी इक उजड़ी हुई महफ़िल ही सही

32

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और फिर एक दिन बैठे बैठे मुझे
अपनी दुनिया बुरी लग गई

जिस को आबाद करते हुए
मेरे मां-बाप की ज़िंदगी लग गई

207

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यार बिछड़ कर तुम ने हँसता बसता घर वीरान किया
मुझ को भी आबाद न रक्खा अपना भी नुक़्सान किया

122

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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ
कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ

मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक
कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ

101

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मैं उन्हीं आबादियों में जी रहा होता कहीं
तुम अगर हँसते नहीं उस दिन मेरी तक़दीर पर

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किताब-ए-इश्क़ में हर आह एक आयत है
पर आँसुओं को हुरूफ़‌‌‌‌-ए-मुक़त्तिआ'त समझ

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अपनी तन्हाई मिरे नाम पे आबाद करे
कौन होगा जो मुझे उस की तरह याद करे

41

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'अनीस' आसाँ नहीं आबाद करना घर मुहब्बत का
ये उन का काम है जो ज़िन्दगी बर्बाद करते हैं

40

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अब इस घर की आबादी मेहमानों पर है
कोई आ जाए तो वक़्त गुज़र जाता है

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अल्लाह तेरे हाथ है अब आबरू-ए-शौक़
दम घुट रहा है वक़्त की रफ़्तार देख कर

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मैं ने आबाद किए कितने ही वीराने 'हफ़ीज़'
ज़िंदगी मेरी इक उजड़ी हुई महफ़िल ही सही

32

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और फिर एक दिन बैठे बैठे मुझे
अपनी दुनिया बुरी लग गई

जिस को आबाद करते हुए
मेरे मां-बाप की ज़िंदगी लग गई

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अपने मूल अर्थ में, 'आब' पानी को संदर्भित करता है, जो जीवनदायी तत्व है जो पोषण और संजीवनी प्रदान करता है। कविता में, यह किसी चीज़ के सार या अंतर्निहित गुण को दर्शाने के लिए विस्तारित होता है, अक्सर पवित्रता, स्पष्टता और गहराई को उजागर करने के लिए उपयोग किया जाता है।

'आब' का उपयोग कवि अक्सर प्रिय की आँखों की पवित्रता या विचार की स्पष्टता को दर्शाने के लिए करते हैं। इसका उपयोग धोखे की धुंधलापन या बंजर हृदय की सूखापन के विपरीत भी किया जा सकता है।

कविता में, 'आब' आत्मा की पवित्रता और हृदय की गहरी इच्छाओं को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण बन जाता है।