Meaning of

अबस

abas • عبث

व्यर्थ; निरर्थक; बेकार

futile; pointless; in vain

عبث; بے فائدہ; بے مقصد

Arabic

न उन लबों पे तबस्सुम न फूल शाख़ों पर
गुज़र गए हैं जो मौसम गुज़रने वाले थे

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होंठ तबस्सुम से गीले हैं जानाँ
या'नी तुम ने कुछ मीठा सोचा है

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तुम्हारे पास आते हैं तो साँसें भीग जाती हैं
मोहब्बत इतनी मिलती है कि आँखें भीग जाती हैं

तबस्सुम इत्र जैसा है हँसी बरसात जैसी है
वो जब भी बात करती है तो बातें भीग जाती हैं

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दिल भी पागल है कि उस शख़्स से वाबस्ता है
जो किसी और का होने दे न अपना रक्खे

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ज़िक्र तबस्सुम का आते ही लगते हैं इतराने लोग
और ज़रा सी ठेस लगी तो जा पहुँचे मयख़ाने लोग

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दिलों को तेरे तबस्सुम की याद यूँँ आई
कि जगमगा उठें जिस तरह मंदिरों में चराग़

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मैं जिसे प्यार का अंदाज़ समझ बैठा हूँ
वो तबस्सुम वो तकल्लुम तिरी आदत ही न हो

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कब बार-ए-तबस्सुम मिरे होंटों से उठेगा
ये बोझ भी लगता है उठाएगा कोई और

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इतना सच बोल कि होंटों का तबस्सुम न बुझे
रौशनी ख़त्म न कर आगे अँधेरा होगा

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ऐसे इक़रार में इनकार के सौ पहलू हैं
वो तो कहिए कि लबों पे न तबस्सुम आए

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न उन लबों पे तबस्सुम न फूल शाख़ों पर
गुज़र गए हैं जो मौसम गुज़रने वाले थे

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होंठ तबस्सुम से गीले हैं जानाँ
या'नी तुम ने कुछ मीठा सोचा है

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अबस व्यर्थता की भावना को व्यक्त करता है, जहाँ प्रयास व्यर्थ लगते हैं और परिणाम अप्राप्य रहते हैं। कविता में यह अक्सर अस्तित्वगत संघर्षों और एक उदासीन दुनिया में अर्थ की खोज को दर्शाता है।

कवि इसका उपयोग अधूरी इच्छाओं की उदासी या मानव प्रयासों की विडंबना व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह सपनों और वास्तविकता के बीच के अंतर को उजागर कर सकता है।

अबस जीवन के अनुत्तरित प्रश्नों के सामने मौन समर्पण को पकड़ता है।