na un labon pe tabassum na phool shaakhon par | न उन लबों पे तबस्सुम न फूल शाख़ों पर

  - Kaif Uddin Khan

न उन लबों पे तबस्सुम न फूल शाख़ों पर
गुज़र गए हैं जो मौसम गुज़रने वाले थे

  - Kaif Uddin Khan

Nature Shayari

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    दोस्त अपना हक़ अदा करने लगे
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    Santosh S Singh
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    Rahat Indori
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    Bashir Badr
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    Kaif Uddin Khan
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    Kaif Uddin Khan
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    Kaif Uddin Khan

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