Meaning of

अमां

amaan • اماں

शरण; सुरक्षा; आश्रय

shelter; protection; refuge

پناہ; حفاظت; آسرہ

Arabic

वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से
वो और थे जो हार गए आसमान से

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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा

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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है
ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है

283

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मेरी तन्हाई देखेंगे तो हैरत ही करेंगे लोग
मोहब्बत छोड़ देंगे या मोहब्बत ही करेंगे लोग

134

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वो ज़माना गुज़र गया कब का
था जो दीवाना मर गया कब का

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और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा

107

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ये कहना था उन से मोहब्बत है मुझ को
ये कहने में मुझ को ज़माने लगे हैं

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आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर
जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे

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हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं
हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं

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अपने सामान को बाँधे हुए इस सोच में हूँ
जो कहीं के नहीं रहते वो कहाँ जाते हैं

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वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से
वो और थे जो हार गए आसमान से

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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा

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अमां सुरक्षा और आश्रय की भावना को व्यक्त करता है। कविता में, यह अक्सर दिल की शांति की खोज और आत्मा की विश्राम की लालसा का प्रतीक होता है। यह जीवन के तूफानों के बीच एक आश्रय की छवि को उभारता है, एक कोमल आलिंगन जो हानि से बचाता है।

कवि 'अमां' का उपयोग सुरक्षा और सांत्वना के विषयों को उभारने के लिए करते हैं। यह शब्द अराजकता के बीच आराम पाने की बात करता है। 'खौफ' जैसे शब्द के साथ इसका विपरीत मानव अनुभव की द्वैतता को उजागर करता है।

कविता में अमां दिल की शाश्वत शांति की खोज की एक कोमल याद दिलाता है। यह उस आश्रय की फुसफुसाहट करता है जिसकी हम सभी तलाश करते हैं।