Meaning of

ब'अद

b'ad • بعد

बाद; आगे; परे

after; later; beyond

بعد; آگے; پرے

Arabic

मैं तेरे बा'द कोई तेरे जैसा ढूँढ़ता हूँ
जो बे-वफ़ाई करे और बे-वफ़ा न लगे

90

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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के
बदन तो चू
मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे

336

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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए
आइना देखा गया, बाल सँवारे गए

314

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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो
तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो

मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ
मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो

295

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तुम्हारे बा'द ये दुख भी तो सहना पड़ रहा है
किसी के साथ मजबूरी में रहना पड़ रहा है

131

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मेरे होंटों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो
कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है

126

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सफ़र में आख़िरी पत्थर के बा'द आएगा
मज़ा तो यार दिसंबर के बा'द आएगा

121

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आज देखा है तुझ को देर के बा'द
आज का दिन गुज़र न जाए कहीं

102

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भेज देता हूँ मगर पहले बता दूँ तुझ को
मुझ से मिलता नहीं कोई मिरी तस्वीर के बा'द

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दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त
कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है

कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं
फिर कहता हूँ पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है

91

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मैं तेरे बा'द कोई तेरे जैसा ढूँढ़ता हूँ
जो बे-वफ़ाई करे और बे-वफ़ा न लगे

90

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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के
बदन तो चू
मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे

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'ब'अद' शब्द समय और स्थान के उस विस्तार का भाव रखता है जो वर्तमान क्षण से परे है। कविता में, यह अक्सर उस प्रतीक्षा या आकांक्षा का भाव जगाता है जो भविष्य में या घटनाओं के विकास में निहित है।

'ब'अद' का उपयोग कवि अलगाव और पुनर्मिलन, समय के प्रवाह, और अज्ञात भविष्य के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह संदर्भ के अनुसार आशा और विषाद दोनों का संकेत दे सकता है।

'ब'अद' अपनी काव्यात्मक सार में आशा और समय के अपरिहार्य प्रवाह के बीच की नाजुक संतुलन को पकड़ता है।