Meaning of

बार-ए-नज़र

baar-e-nazar • بار نظر

दृष्टि का बोझ; नज़र का भार

burden of sight; weight of vision

نظر کا بوجھ; بصارت کا وزن

Persian

रुख़सार, जबीं हर बार नज़र खींचे अपनी ओर
मैं तिल को नुक्ता बिंदी को महताब लिखूँगा

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एक ही बार नज़र पड़ती है उन पर ‘ताबिश’
और फिर वो ही लगातार नज़र आते हैं

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मेरी इक शर्त है तू निभा के दिखा
ज़िंदगी है अकेले बिता के दिखा

जंग से पहले ही हार जाऊँगा मैं
यार इक बार नज़रें उठा के दिखा

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वही मंज़र मुझे हर बार नज़र आता है
आँख मूँदूँ तो मुझे यार नज़र आता है

ऐसे तो मौत का मेरी कोई क़ातिल ही नहीं
वैसे हर शख़्स गुनहगार नज़र आता है

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रुख़सार, जबीं हर बार नज़र खींचे अपनी ओर
मैं तिल को नुक्ता बिंदी को महताब लिखूँगा

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एक ही बार नज़र पड़ती है उन पर ‘ताबिश’
और फिर वो ही लगातार नज़र आते हैं

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यह वाक्यांश किसी की दृष्टि द्वारा वहन किए गए भावनात्मक या आध्यात्मिक भार का सुझाव देता है। कविता में, यह दृष्टि की गहराई या जीवन की जटिलताओं को देखने की भारीपन का प्रतीक हो सकता है।

कवि इसे कुछ गहराई से हिलाने या परेशान करने वाली चीज़ को देखने या समझने के गहरे प्रभाव को व्यक्त करने के लिए उपयोग कर सकते हैं। यह आँखों द्वारा वहन किए गए मौन बोझ को भी व्यक्त कर सकता है।

बार-ए-नज़र हमें उन अदृश्य भारों की याद दिलाता है, जो केवल आत्मनिरीक्षण के लेंस के माध्यम से देखे जाते हैं।