वही मंज़र मुझे हर बार नज़र आता हैआँख मूँदूँ तो मुझे यार नज़र आता हैऐसे तो मौत का मेरी कोई क़ातिल ही नहींवैसे हर शख़्स गुनहगार नज़र आता है— anupam shah