Meaning of

बढ़कर

badhkar • بڑھ کر

आगे; अधिक; पार

beyond; surpassing

آگے; زیادہ; پار

Sanskrit

मुझ सेे बढ़ कर कोई पागल क्या होगा
मैं सपने में ग़ज़लें पढ़ता रहता हूँ

मेरे ख़ातिर तू दुनिया से लड़ता है
मैं कैसा हूँ तुझ सेे लड़ता रहता हूँ

9

Download Image

तुम से बढ़कर कौन दुनिया में मेरे नज़दीक है
इक तुम्हीं तो हो कि जिस का दिल दुखा सकता हूँ मैं

55

Download Image

इश्क़ कहाँ अब पहले वाला होता है
इश्क़ से बढ़कर इश्क़ का चर्चा होता है

47

Download Image

हद से बढ़ कर हसीन लगते हो
झूटी क़स
में ज़रूर खाया करो

43

Download Image

ज़िंदगी पर इस से बढ़ कर तंज़ क्या होगा 'फ़राज़'
उस का ये कहना कि तू शाएर है दीवाना नहीं

41

Download Image

देख कैसे धुल गए है गिर्या-ओ-ज़ारी के बा'द
आसमाँ बारिश के बा'द और मैं अज़ादारी के बा'द

इस सेे बढ़ कर तो तुझे कोई हुनर आता नहीं
सोचता हूँ क्या करेगा दिल आज़ारी के बा'द

37

Download Image

टूटते रिश्तों से बढ़कर रंज था इस बात का
दरमियाँ कुछ दोस्त थे, और दोस्त भी ऐसे, के बस

36

Download Image

फ़रिश्ते से बढ़ कर है इंसान बनना
मगर इस में लगती है मेहनत ज़ियादा

26

Download Image

वक़्त ए इफ़्तार ख़ुद रब था मेरे क़रीब
तुझ से बढ़ कर मगर कुछ न माँगा गया

24

Download Image

उस से बढ़ कर किया मिलेगा और इनआम-ए-जुनूँ
अब तो वो भी कह रहे हैं अपना दीवाना मुझे

18

Download Image

मुझ सेे बढ़ कर कोई पागल क्या होगा
मैं सपने में ग़ज़लें पढ़ता रहता हूँ

मेरे ख़ातिर तू दुनिया से लड़ता है
मैं कैसा हूँ तुझ सेे लड़ता रहता हूँ

9

Download Image

तुम से बढ़कर कौन दुनिया में मेरे नज़दीक है
इक तुम्हीं तो हो कि जिस का दिल दुखा सकता हूँ मैं

55

Download Image

'बढ़कर' शब्द किसी निश्चित बिंदु से आगे जाने या किसी सीमा को पार करने को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर साधारण अनुभवों के पार जाने का प्रतीक होता है, असाधारण या दिव्य क्षेत्र में पहुँचने का।

कवि 'बढ़कर' का उपयोग मानव सीमाओं को पार करने के विचार को व्यक्त करने के लिए करते हैं, चाहे वह प्रेम में हो, महत्वाकांक्षा में, या आध्यात्मिक खोजों में। यह एक प्रकार की आकांक्षा और असीमता की भावना को जागृत करता है।

कविता में, 'बढ़कर' आत्मा को अनंत की खोज करने के लिए आमंत्रित करता है, इसे साधारण से ऊपर उठने के लिए प्रेरित करता है।