Meaning of

बख़्स

bakhs • بخش

माफ करना; देना

forgive; grant

معاف کرنا; دینا

Persian

ज़मीं को तर-ब-तर करने किसी दिन आएगा बादल
न जाने किन ग़रीबों के घरों को खाएगा बादल

सितारे नोच लाऊँगा किसी दिन ज़िद पे आया तो
अभी ग़र्दिश में हूँ यारों बहुत इतराएगा बादल

ये सारी मछलियाँ जब बद-दुआ देने लगेंगी तब
समुंदर प्यास से तड़पेगा और मर जाएगा बादल

कहीं पर कम कहीं ज़्यादा ये कैसा फ़ैसला तेरा
सॅंभल जा वक़्त है वरना बहुत पछताएगा बादल

मुनाफ़िक़ है ये रातों का किसी को भी नहीं बख़्शा
जवानी ज़ुल्फ़ आँखें और क्या-क्या खाएगा बादल

हमीं हैं जो तुझे सर पे चढ़ाकर फिरते रहते हैं
कुशादा ज़र्फ़ कर लें हम तो क्या टिक पाएगा बादल

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ख़ुदा ने ये सिफ़त दुनिया की हर औरत को बख़्शी है
कि वो पागल भी हो जाए तो बेटे याद रहते हैं

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छू लेने दो नाज़ुक होंठों को, कुछ और नहीं हैं जाम हैं ये
क़ुदरत ने जो हम को बख़्शा है, वो सब सेे हसीं ईनाम हैं ये

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ज़िन्दगी छीन ले बख़्शी हुई दौलत अपनी
तू ने ख़्वाबों के सिवा मुझ को दिया भी क्या है

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बख़्शी हैं हम को इश्क़ ने वो जुरअतें 'मजाज़'
डरते नहीं सियासत-ए-अहल-ए-जहाँ से हम

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मुझे भी बख़्श दे लहजे की ख़ुश-बयानी सब
तेरे असर में हैं अल्फ़ाज़ सब, मआ'नी सब

मेरे बदन को खिलाती है फूल की मानिंद
कि उस निगाह में है धूप, छाँव, पानी सब

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ये भी ए'जाज़ मुझे इश्क़ ने बख़्शा था कभी
उस की आवाज़ से मैं दीप जला सकता था

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तेरे हसीन तसव्वुर को सामने ला कर
शब-ए-फ़िराक़ को बख़्शी है चाँदनी मैं ने

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उस सेे बिछड़े इक ज़माना हो गया
ज़ख़्म इस दिल का पुराना हो गया

उस की यादों से कहो अब बख़्स दें
बेहद इस दिल को सताना हो गया

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अब ख़ुदा नेमतें हमें बख़्शे
चाँद जैसी हमारी बेग़म हो

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ज़मीं को तर-ब-तर करने किसी दिन आएगा बादल
न जाने किन ग़रीबों के घरों को खाएगा बादल

सितारे नोच लाऊँगा किसी दिन ज़िद पे आया तो
अभी ग़र्दिश में हूँ यारों बहुत इतराएगा बादल

ये सारी मछलियाँ जब बद-दुआ देने लगेंगी तब
समुंदर प्यास से तड़पेगा और मर जाएगा बादल

कहीं पर कम कहीं ज़्यादा ये कैसा फ़ैसला तेरा
सॅंभल जा वक़्त है वरना बहुत पछताएगा बादल

मुनाफ़िक़ है ये रातों का किसी को भी नहीं बख़्शा
जवानी ज़ुल्फ़ आँखें और क्या-क्या खाएगा बादल

हमीं हैं जो तुझे सर पे चढ़ाकर फिरते रहते हैं
कुशादा ज़र्फ़ कर लें हम तो क्या टिक पाएगा बादल

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ख़ुदा ने ये सिफ़त दुनिया की हर औरत को बख़्शी है
कि वो पागल भी हो जाए तो बेटे याद रहते हैं

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बख़्स उदारता और क्षमा का भाव व्यक्त करता है। कविता में, यह अक्सर हृदय की उदारता, क्षमा करने और अनुग्रह प्रदान करने की क्षमता का प्रतीक होता है।

कवि 'बख़्स' का उपयोग दया और परोपकार के विषयों का पता लगाने के लिए करते हैं। यह प्रतिशोध के विपरीत होता है, क्षमा की महानता को उजागर करता है।

बख़्स हमें क्षमा में पाई जाने वाली शक्ति की याद दिलाता है, एक कोमल शक्ति जो क्रोध से परे होती है।