Meaning of

बलि

bali • بلی

बलिदान; अर्पण; शिकार

sacrifice; offering; victim

قربانی; نذر; شکار

Sanskrit

ख़ुदा और इबलीस के ही झड़प का है हासिल
ये दुनिया, ये आदम, ये हव्वा, ये जन्नत, जहन्नम

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सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा
हम बुलबुलें हैं इस की ये गुलसिताँ हमारा

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हम तोहफ़े में घड़ियाँ तो दे देते हैं
एक दूजे को वक़्त नहीं दे पाते हैं

आँखें ब्लैक एंड व्हाइट हैं तो फिर इन
में
रंग बिरंगे ख़्वाब कहाँ से आते हैं?

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डगर मुश्किल मगर है हौसले पुरज़ोर सीने में
रगों में रक्त है उबला मचा है शोर सीने में

सफ़र में मुश्किलें क्या ख़ाक रोकेगी मेरा रस्ता
नज़र में मंज़िलें और आग है घनघोर सीने में

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इब्लीस डर गया मैं तेरे साथ जो हुआ
मेरे भी कुछ सवाल थे अल्लाह के लिए

दरिया किनारे हैं खड़े बेड़े बड़े बड़े
पानी ही पानी बीच में मल्लाह के लिए

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मेरी कोई भी दुआ क्यूँ सुनता तू नहीं
मैं इबलीस से भी बुरा हूँ क्या? मेरे ख़ुदा

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वाबस्ता ऐ जाँ की डोर मुझे दे
अपनी दुनिया का इक छोर मुझे दे
तू जिस ग़म में टूट रही है पगली
चल ला वो अपना पुरज़ोर मुझे दे

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अगर जन्नत मिला करती फ़क़त सज्दों के बदले में
तो फिर इबलीस मुर्शिद सब सेे पहले जन्नती होता

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इबलीस जैसे सज्दे अदा कर के रात दिन
चाहत शजर के दिल में हैं देखो बहिश्त की

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अब उलझ पड़े हैं सारे बाल मेरे
बे-सवाल हैं सारे सवाल मेरे

देख कर मुझे इब्लीस भी है हैराँ
हैं कि ऐसे कुछ 'यासिर' कमाल मेरे

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ख़ुदा और इबलीस के ही झड़प का है हासिल
ये दुनिया, ये आदम, ये हव्वा, ये जन्नत, जहन्नम

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सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा
हम बुलबुलें हैं इस की ये गुलसिताँ हमारा

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मूल रूप में, 'बलि' का अर्थ एक धार्मिक अर्पण या बलिदान होता है, अक्सर किसी देवता के लिए। कविता में, यह शब्द भक्ति, आत्मसमर्पण और किसी मूल्यवान वस्तु को त्यागने की मार्मिक सुंदरता को दर्शाता है।

कवि अक्सर 'बलि' का उपयोग प्रेम और बलिदान के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह प्रेम के अंतिम कार्य का प्रतीक हो सकता है, जहाँ कोई अपने प्रिय के लिए सब कुछ त्याग देता है। यह 'मोहब्बत' जैसे शब्दों के विपरीत है जो स्वयं भावना पर केंद्रित होते हैं।

कविता के क्षेत्र में, 'बलि' प्रेम और भक्ति की गहरी गहराइयों का प्रमाण है। यह हमें बलिदान की सुंदरता की याद दिलाता है।