Meaning of

बरक़त

barqat • برکت

आशीर्वाद; समृद्धि; प्रचुरता

blessing; prosperity; abundance

برکت; خوشحالی; فراوانی

Arabic

बतौरे ख़ास उस की तो हिफ़ाज़त हो
किसी घर की शजर गर एक औरत हो

घरों में जिन के पूजी जाती हैं नारी
वहीं पर सिर्फ़ बरकत की इजाज़त हो

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मेरा बटुआ नहीं होता है ख़ाली
तेरी तस्वीर की बरकत रही माँ

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रोज़ी में बरकत की ख़ातिर सर झुकता है
सर झुकते ही रोज़ी में बरकत के सपने

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मुहब्बत में हम ने सियासत न की
तभी इश्क़ में कोई बरकत न की

उसे मानता था मैं अपना ख़ुदा
कभी उस की लेकिन इबादत न की

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चाँदनी की तरह तुम, चमकते रहो
फूल बनकर के गुलशन में खिलते रहो

है दुआ, दे ख़ुदा, ख़ूब बरक़त तुम्हें
आई दिन यूँँ ही आशिक़ बदलते रहो

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सपने गए सुकून भी उल्फ़त चली गई
मिलने की अपने आप से फ़ुर्सत चली गई

मेरी तो बोलने की ही आदत चली गई
तेरे ही साथ सारी शरारत चली गई

खुशियांँ थीं उस सेे घर में थीं आंँगन में रौनकें
बिटिया के साथ घर की भी बरकत चली गई

छूटा तुम्हारा साथ तो बाक़ी ही क्या बचा
दिल में जो पल रही थी वो हसरत चली गई

आते नहीं फ़क़ीर न साइल भी आजकल
माँ क्या गई कि घर की रिवायत चली गई

मेरे सुख़न पे तू ने उठाईं जो उँगलियाँ
मेरी तमाम उम्र की मेहनत चली गई

यूँँंँ भी कभी जहान में इफ़रात में न थी
थोड़ी बहुत थी वो भी सदाक़त चली गई

होती नहीं है शे'र की आमद भी अब नज़र
तुम क्या गए कि लफ़्ज़ की ताक़त चली गई

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उस को कहाँ ख़बर कि गईं घर से बरकतें
वो ख़ुश है बस इसी में कि मेहमान तो गया

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मुफलिसी में रहे अदाकारी
है अमीरी, ख़राब बरकत को

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छोड़ दी हम ने पूजा नमाज़े सभी
आए कैसे घरों में भला बरकतें

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धोखे के सौदे में बरकत ज़्यादा है
उल्फत ऐसा धंधा सीधा सादा है

गर तुम दोगे धोखे का रूमाल मुझे
मैं चादर दूँगा बदले में वा'दा है

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बतौरे ख़ास उस की तो हिफ़ाज़त हो
किसी घर की शजर गर एक औरत हो

घरों में जिन के पूजी जाती हैं नारी
वहीं पर सिर्फ़ बरकत की इजाज़त हो

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मेरा बटुआ नहीं होता है ख़ाली
तेरी तस्वीर की बरकत रही माँ

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'बरकत' मूल रूप से दिव्य आशीर्वाद या समृद्धि का संकेत देता है। कविता में, यह अक्सर अनुग्रह और प्रचुरता की भावना को व्यक्त करने के लिए उपयोग किया जाता है, एक ऐसा जीवन जो आध्यात्मिक या भौतिक उपहारों से समृद्ध होता है।

कवि 'बरकत' का उपयोग दिव्य कृपा और जीवन की समृद्धि के विषयों को उजागर करने के लिए करते हैं। यह आध्यात्मिक ज्ञान और भौतिक संपत्ति दोनों का प्रतीक हो सकता है। अक्सर कमी या अभाव के विपरीत होता है।

कविता में, 'बरकत' जीवन के उदार उपहारों और उस अनुग्रह का प्रतीक बन जाता है जो अस्तित्व को समृद्ध करता है।