Meaning of

चश्म-ए-मुंतज़र

chashm-e-muntazar • موتی

प्रतीक्षारत आँख; आशान्वित दृष्टि

waiting eye; expectant gaze

منتظر آنکھ; امید بھری نظر

Persian

तुम पर जँचता है भोलापन
माथे पर बिंदी के जैसे

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आँसू हमारे गिर गए उन की निगाह से
इन मोतियों की अब कोई क़ीमत नहीं रही

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जो मोतियों की तलब ने कभी उदास किया
तो हम भी राह से कंकर समेट लाए बहुत

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पुतलियों में घुला समुंदर है
मोतियों की दुकान आँखें हैं

आप तहक़ीक़ ही नहीं करते
सब ख़ज़ानों की खान आँखें हैं

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चला आया मकाँ ख़ाली करा कर मैं
जले हैं आशियाने बे-ज़बाँ के भी

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है वही कश्ती पुरानी है वही दरिया मेरा
जिस पे तू आने न पाया है वही रस्ता मेरा

मैं मिरी मसरूफ़ियत से तंग आ जाता हूँ दोस्त
मुझ को सीने से लगा के वक़्त कर ज़ाया' मेरा

अपनी वहशत का तक़ाज़ा ढूंढता हूँ दर-ब-दर
ले गया है कोहकन जिस रोज़ से तेशा मेरा

याद कर कूचा-नवर्दी,याद कर उल्फ़त के दिन
याद कर बातें मेरी और याद कर चेहरा मेरा

जब हवाएँ थक गईं थीं कोशिशें कर दश्त में
रेत तब रक्साँ हुई थी चूम कर साया मेरा

बारिशों को मौसमों का खेल सब कहते हैं पर
रो पड़े थे अब्र-पारे जान कर क़िस्सा मेरा

आँख वो हँसती रही तो खिल उठे सूखे गुलाब
आँख वो रोने लगी तो रो पड़ा सहरा मेरा

ख़ुसरवान-ए-शहर मैं हो जाऊँगा इक लम्स से
और फ़क़त इक दीद से भर जाएगा कासा मेरा

मैं किताबों के जहाँ का एक ख़ुशक़िस्मत किताब
नाव बच्चों ने बनाया फाड़ कर सफ़्हा मेरा

उस नज़र को ख़्वाहिशों का शौक़ दे मेरा ख़याल
उस जबीं को रौशनी देता रहे बोसा मेरा

मैं मुसलसल बंद करता हूँ मगर फिर दम-ब-दम
याद उस की खोलती जाती है दरवाज़ा मेरा

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मुक़द्दर तो भरा है मोतियों से
कमी है सिर्फ़ तेरी कोशिशों की

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क्यूँ कोई कोख जो सूनी हो वो शर्मिंदा हो
क्या ज़रूरी है कि हर सीप से मोती निकले

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माँ की गाली देकर हिट हो जाते हैं
इस कलयुग में कौआ मोती खाता है

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वो जब यहाँ था तो हम देखते न थे उस को
वो जा रहा है तो हम खिड़कियाँ बदलते हैं

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तुम पर जँचता है भोलापन
माथे पर बिंदी के जैसे

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आँसू हमारे गिर गए उन की निगाह से
इन मोतियों की अब कोई क़ीमत नहीं रही

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यह वाक्यांश प्रतीक्षा और आशा के सार को समेटे हुए है। यह उन आँखों की तस्वीर खींचता है जो लगातार क्षितिज को खोज रही हैं, किसी प्रियजन या लंबे समय से प्रतीक्षित क्षण के आने की प्रतीक्षा कर रही हैं।

कवि इस वाक्यांश का उपयोग अक्सर लालसा और प्रतीक्षा के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रेम के लिए अनंत प्रतीक्षा या उज्जवल भविष्य की आशा का प्रतीक भी हो सकता है।

'चश्म-ए-मुंतज़र' में, आँखें एक ऐसे दिल की खिड़कियाँ हैं जो आशा और अभी तक पूरी नहीं हुई सपनों के साथ धड़कता है।