Meaning of

छिद

chhid • چھید

छेद; अंतर; खुला स्थान

hole; gap; opening

چھید; فرق; کھلا مقام

Unknown

इश्क़ क्या है ये पूछ-पूछ कर आप
क्यूँ जले पर नमक छिड़कते हैं

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एक नया आशिक़ है उस का, जान छिड़कता है उसपर
मुझ को डर है वो भी इक दिन मय-ख़ाने से निकलेगा

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होली के अब बहाने छिड़का है रंग किस ने
नाम-ए-ख़ुदा तुझ ऊपर इस आन अजब समाँ है

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बहार-ए-गुलिस्ताँ हम को न पहचाने तअज्जुब है
गुलों के रुख़ पे छिड़का है बहुत ख़ून-ए-जिगर हम ने

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ये और बात कि मरहम नहीं हुए लेकिन
नमक छिड़कना न आया किसी के ज़ख़्मों पर

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तुम्हारी याद के क़िस्से नहीं छिड़ते
यहाँ अब हुस्न के सिक्के नहीं चलते

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हो ज़रा बात सनक जाती है मेरी पगली
बे वज़ह मुझ पे भड़क जाती है मेरी पगली

एक मासूम सी मुस्कान पे मुस्कान छिड़क
मेरी हर भूल को ढक जाती है मेरी पगली

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ख़राबों में रईसी की गली को छोड़ना अच्छा
गले की फांँस बन जाए तो रिश्ता तोड़ना अच्छा

नहीं अच्छा अगर तुम झोंक दो तूफ़ान में कश्ती
कभी हो छेद कश्ती में अगर तो मोड़ना अच्छा

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यादों का हक़ अदा हुआ हर रात की तरह
चल अब ये अश्क पोंछ के सो जाते हैं 'अनस'

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मैं तुझ को भूल के ज़िन्दा रहा करामत हैं
सुई के छेद से हाथी गुज़र गया इक दिन

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इश्क़ क्या है ये पूछ-पूछ कर आप
क्यूँ जले पर नमक छिड़कते हैं

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एक नया आशिक़ है उस का, जान छिड़कता है उसपर
मुझ को डर है वो भी इक दिन मय-ख़ाने से निकलेगा

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मूल रूप से 'छिद' का अर्थ है एक भौतिक छेद या अंतर, जो किसी बाधा के पार देखने या गुजरने की अनुमति देता है। कविता में, यह शब्द अक्सर भेद्यता या उजागर होने की भावना को दर्शाता है, जहाँ अदृश्य चीज़ें दिखाई देने लगती हैं और छिपी हुई भावनाएँ सतह पर आ जाती हैं।

'छिद' का उपयोग कवि भावनात्मक उजागरता और मानवीय संबंधों की नाजुकता की थीम को खोजने के लिए करते हैं। यह संबंधों में दरारों या उन खुली जगहों का प्रतीक हो सकता है, जिनसे रोशनी और समझ अंधकार में प्रवेश करती है।

कविता में, 'छिद' हमारे भीतर के अदृश्य स्थानों के लिए एक रूपक बन जाता है, जो आत्मनिरीक्षण और संबंध को आमंत्रित करता है।