ये 'इश्क़ क्या है इक ख़ता है और कुछ नहीं
तो हिज्र क्या है इक सज़ा है और कुछ नहीं
वैसे तो सभी आदतें अच्छी हैं यार की
हाँ बस ज़रा सा बेवफ़ा है और कुछ नहीं
चाहे रगों से आख़िरी क़तरा निचोड़ ले
मेरे लहू में बस वफ़ा है और कुछ नहीं
अब हाल क्या बताऊँ तुम्हें ठीक-ठाक हूँ
थोड़ा सा दिल दुखा हुआ है और कुछ नहीं
क्यूँँ देखता है आदमी उम्मीद से इसे
जब आसमाँ में बस खु़दा है और कुछ नहीं
सीने में बाईं और मेरे दिल की शक्ल में
यादों का एक मक़बरा है और कुछ नहीं
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