खेलते हो दूसरों की बेटियों से
फिर वफ़ा क्यूँ चाहते हो लड़कियों से
एक-तरफ़ा इश्क़ भी कब तक चलेगा
फूल को भी हो मुहब्बत तितलियों से
देखती थी वो मुझे जब छुप छुपाकर
हो गई थी तब मुहब्बत खिड़कियों से
पूछता हूँ मैं खु़दास क्या पड़ी थी
क्यूँ निकाला इस बला को पसलियों से
है असीरी ही मुक़द्दर गर 'अनस' का
क्यूँ न फिर मैं इश्क़ कर लूँ बेड़ियों से
— Anas Khan















