ये मत सोचो कि हर-सू रौशनी है
चराग़ों के तले भी तीरगी है
मेरे किरदार में वो बेबसी है
कि मुझ पर ख़ुद कहानी रो रही है
मेरे दिल में हज़ारों ग़म छुपे हैं
मेरे चेहरे पे तो झूठी हँसी है
सवारूॅं क्या मुहब्बत से जवानी
मुहब्बत ने ही तो बरबाद की है
तुझे लगता है मुझको 'इश्क़ है पर
मेरा मक़सद तो तेरी दोस्ती है
दवा भी अब वही लड़की है मेरी
वो जो बीमार करके जा रही है
तुम्हारे बाद मैंने ज़िंदगी भी
गुज़ारी तो नहीं बस काट ली है
नहीं है ख़ानदानी बेवफ़ा वो
अनस वो शौक़ से दिल तोड़ती है
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