Anas Khan

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@Anaskhan

Anas Khan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Anas Khan's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher(23)
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Sher

तुझ को सज़ा न दी जो मेरे दिल के क़त्ल की तो मैं कहूँगा वाक़ई पत्थर का है ख़ुदा — Anas Khan
जाना ही था जो आप को जाते एज़ाज़ से ये क्या किया कि ख़ुद को गिरा कर चले गए — Anas Khan
तेरे बग़ैर मौत तो आई नहीं मगर खु़दको हयात कह सकें ऐसा भी कुछ नहीं — Anas Khan
उस ने कहा था जिस घड़ी उल्फत है आपसे मैं जानता था यार कि बस कह रही है वो — Anas Khan
मैं ने ग़मों को ओढ़ के रातें बिताई हैं दिन का लिबास था जो मेरा आप का था ग़म — Anas Khan
बे घर कभी वो ख़ुल्द से होते नहीं मगर आदम बिचारे आ गए औरत की बात में — Anas Khan
यादों का हक़ अदा हुआ हर रात की तरह चल अब ये अश्क पोंछ के सो जाते हैं 'अनस' — Anas Khan
अगर मर्द हो तो वफ़ा करनी होगी मियाँ बे-वफ़ाई पे औरत का हक़ है — Anas Khan
क्यूँँ मुहब्बत से देखूँ इसे रात भर चाँद है ये तेरे गाल का तिल नहीं — Anas Khan
दिल के सभी ग़मों का ये वाहिद इलाज है लोगों ने दे दिया है जिसे नाम मय कशी — Anas Khan
फिर क्या मजाल लूट ले हाकिम कोई इसे बस मुल्क को जागी हुई आवाम चाहिए — Anas Khan
मैं ने कहा था और कहना सच हुआ जिस जिस में रोया हर वो सपना सच हुआ — Anas Khan
लौट आने का इरादा हो अगर तो बेझिझक आ मैं ख़ुदा तो हूँ नहीं जो शिर्क की माफ़ी न दूँगा — Anas Khan
दिल हारने के बा'द ही आता है ये सुख़न अब तक किसी ने कोख से शाइ'र नहीं जना — Anas Khan

Ghazal

ये न सोचो रफ़ाक़त नहीं है बस ग़रीबों की इज़्ज़त नहीं है मालदारों से कह कर बताओ हम को तुम सेे मुहब्बत नहीं है जाने वाले मुझे साथ ले जा मुझ को मेरी ज़रूरत नहीं है उस ने लौटा दिया दिल ये कह कर तेरा दिल कोई दौलत नहीं है बद-दुआ भी नहीं दूँ मैं उस को मुझ में इतनी शराफ़त नहीं है दिल का झुकना ज़रूरी है बंदे सर झुकाना इबादत नहीं है साथ दुनिया भी हो तब भी क्या है गरचे तुझ सेे ही क़ुर्बत नहीं है सच बताऊँ तो होंठों में तेरे अब वो पहले सी लज़्ज़त नहीं है मर्द होना भी कितना बुरा है रोने की भी सहूलत नहीं है मौत ही अब निकालेगी ग़म से ज़िंदगी में ये क़ुव्वत नहीं है — Anas Khan
तरीका आप का अच्छा नहीं है अचानक कह दिया रिश्ता नहीं है किसी को आज तक रोका नहीं है हमारा दिल कोई पिंजरा नहीं है अगर ये हुस्न वाले बा वफ़ा हों मुहब्बत आग का दरिया नहीं है तुम्हारा ज़िक्र जाना अब जिधर हो हमारा दिल उधर लगता नहीं है यक़ीनन ख़ुद-कुशी करना ग़लत है मगर अब दूसरा रस्ता नहीं है तुम्हें हम भूल कर भी जी सकेंगे हमारे पास वो जज़्बा नहीं है दिखाता है हमेशा मुस्कुराता हमारा आइना सच्चा नहीं है यहीं पर देखलो चेहरा हमारा तुम्हें तो क़ब्र पर आना नहीं है तवाइफ़ ने लिखा था दर पे अपने बदन के साथ दिल बिकता नहीं है हमारे इश्क़ ने ही ग़म जना है तभी औलाद से शिकवा नहीं है ये जाना कूचा-ए- जानाँ में आ कर वफ़ादारों का ये क़स्बा नहीं है मुझे तो आपने रोना सिखाया मेरी आँखों का ये पेशा नहीं है — Anas Khan
बरसों तलक जहान में ढूँडा नहीं मिला कोई भी हम को आपसे अच्छा नहीं मिला चेहरे तो मिल गए थे कई दिल-नशीं मगर रुख़्सार पे वो क़ाफ़ का नुक़्ता नहीं मिला या तो जबीं नहीं मिली या ज़ुल्फ़ रह गई सामान मेरे क़त्ल का पूरा नहीं मिला हम पर चलाए तीर निगाहों के हुस्न ने लेकिन कोई निशानची तुम सा नहीं मिला इक बाग़ में गए जहाँ लाखों गुलाब थे लेकिन लबों सा आप के ग़ुंचा नहीं मिला मैं ग़म मनाऊँ आप के जाने का किस तरह मैं ऐसा क़ैस हूँ जिसे सहरा नहीं मिला मैं क़ैद में भी ज़िंदगी हँस कर गुज़ारता जो मुझ को चाहिए था वो पिंजरा नहीं मिला हम बदनसीब लोग हैं रोने के वास्ते छत पर हमें उमैर सा कमरा नहीं मिला ग़म से 'अनस' रिहाई का कुल काइनात में इक रास्ता है ख़ुद-कुशी दूजा नहीं मिला — Anas Khan