कोई आरज़ू कोई हसरत तो होगी
तुझे भी किसी से मुहब्बत तो होगी
मुझे मिलने आई है तन्हाई में वो
ज़ियादा नहीं पर शरारत तो होगी
कोई दिल हो या कोई गारे का घर हो
जहाँ 'इश्क़ होगा अज़िय्यत तो होगी
वो कहती है शादी से पहले नहीं कुछ
मगर उसके दिल में भी चाहत तो होगी
चलो मय-कदे ले चलो यार मुझको
वहाँ मेरे जैसों की इज़्ज़त तो होगी
अगर सच-क़लामी हिमाक़त है तो फिर
मैं शायर हूँ मुझ सेे हिमाक़त तो होगी
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