अच्छे भले थे इश्क़ में हम यार लुट गए
क्यूँ दिल कि बात मान ली बेकार लुट गए
दरिया ए इश्क़ पर मियाँ क़ब्ज़ा था हुस्न का
इस पार के बचे हुए उस पार लूट गए
हम ऐसे लोग भी तो हैं दुनिया में आज भी
जो इक ख़ुशी की चाह में सौ बार लुट गए
देखो जो हुस्न देख के मजनूँ हुए थे वो
इक दो बदन को चूम के हुश्यार लूट गए
ख़ादिम तो ख़ैर आप का नादान था अनस
लेकिन ये क्या ग़ज़ब हुआ सरकार लुट गए
— Anas Khan















