दर्द से मुझ को निकलना भी नहीं हैसच कहूँ तो कोई रस्ता भी नहीं हैज़िन्दगी ऐसी ग़ज़ल है दोस्त जिसमेंशे'र कम हैं और मक़्ता भी नहीं है— Anas Khan