Meaning of

दाख़िल

daaKHil • داخل

प्रवेश; दाखिला

enter; admission

داخل ہونا; داخلہ

Arabic

अगर स्कूल चेहरों को पढ़ाना मुब्तदा कर दे
तो मैं भी दाख़िला ले लूँ बिना सोचे विचारे याँ

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लगाऊँ हाज़िरी मैं भी समय से
किसी स्कूल में दाख़िल करा दो

सुलहनामा लिए दर पे खड़ा हूँ
मुक़दमा कोर्ट से ख़ारिज करा दो

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ये मुहब्बत दाख़िले के वक़्त आसाँ लगती है
पर मुहब्बत में शुरू फिर इम्तिहाँ हो जाते हैं

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उसी के दम से है मुस्तमिर निज़ाम-ए-गर्दिश-ए-आसमाँ
क़रार-ओ-रंगत-ओ-रौनक-ए-जहान-ए-फानी है राबिया

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मकतब-ए-इश्क़ में दाख़िल हो अदब से 'साहिल'
क़ैस-ओ-फ़रहाद भी इस दर पे खड़े मिलते हैं

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दिल की धड़कन थमी तो क्या होगा
कारनामा कोई बड़ा होगा

ज़िंदगी से नजात पा लोगे
मौत के घर में दाख़िला होगा

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दिल से उस का असर नहीं निकला
ग़म निकाला मगर नहीं निकला

इस तरह से हवा हुई दाख़िल
फिर परिंदों का डर नहीं निकला

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इश्क़ के मकतब में जब ले ही लिया है दाख़िला
आते आते मुझ को भी ज़ेर-ओ-ज़बर आ जाएगा

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आए भी तुम थे तो चोर दरवाज़े से
ये मिरी ही ख़ता तुम को दाख़िल किया

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दर्द का क़ाफ़िला नहीं रुकता
साँसों का सिलसिला नहीं रुकता

मुझ
में ही मैं रहा नहीं हूँ अब
ग़म का जो दाख़िला नहीं रुकता

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अगर स्कूल चेहरों को पढ़ाना मुब्तदा कर दे
तो मैं भी दाख़िला ले लूँ बिना सोचे विचारे याँ

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लगाऊँ हाज़िरी मैं भी समय से
किसी स्कूल में दाख़िल करा दो

सुलहनामा लिए दर पे खड़ा हूँ
मुक़दमा कोर्ट से ख़ारिज करा दो

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'दाख़िल' प्रवेश करने या किसी स्थान या स्थिति में प्रवेश की क्रिया को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर नए अनुभवों की यात्रा या भावनाओं के क्षेत्र में स्वीकृति का प्रतीक होता है।

कवि 'दाख़िल' का उपयोग संक्रमण और परिवर्तन को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह नई शुरुआत की उत्तेजना या अज्ञात के भय को व्यक्त कर सकता है।

'दाख़िल' अज्ञात में कदम रखने के लिए आवश्यक साहस की बात करता है। यह हमें याद दिलाता है कि हर प्रवेश एक नया अध्याय है।