Meaning of

दर्द-ओ-ग़म

dard-o-gham • درد و غم

दर्द और ग़म; पीड़ा

pain and sorrow; anguish

درد و غم; کرب

Persian

मुहब्बत ये मुहब्बत वो मुहब्बत
सिवाए दर्द-ओ-ग़म के कुछ नहीं है

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हम आज राह-ए-तमन्ना में जी को हार आए
न दर्द-ओ-ग़म का भरोसा रहा न दुनिया का

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सुना है खूब दर्द-ओ-ग़म सुनाते हो जमाने को
तो लाओ दर्द अपना सारे का सारा मुझे दे दो

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ज़िंदगी को गुनगुना कर चल दिए
मौत को अपना बना कर चल दिए

 
उम्र भर की दोस्ती जाती रही

आप ये क्या गुल खिलाकर चल दिए
 

अब यक़ीं उन की ज़बाँ का क्या करें
जो फ़क़त सपने दिखा कर चल दिए

 
आज उन का दिल दुखा शायद बहुत

बज़्म से आँसू बहा कर चल दिए
 

बे-बसी में और क्या करते 'रज़ा'
दर्द-ओ-ग़म अपना सुनाकर चल दिए

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ये कैसा क़र्ज़ मैं ने ले-लिया है इश्क़ का, क्या बतलाऊँ
मुझे हर रोज़ दर्द-ओ-ग़म से ई एम आई भरना पड़ता है

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शौक़ है तुम को मेरी ग़ज़ल, मेरी आवाज़ में सुनने का
मेरे अश'आर में दर्दो-ग़म के सिवा कुछ भी तो है नहीं

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दर्द-ओ-ग़म देने से पहले मुझ को इतना जान लो
इंतिकाम-ए-दर्द-ओ-ग़म ले लूँगा तुम सेे हश्र में

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यही तौर-ए-ज़िंदगी है, मैं दर्दो-ग़म ज़ख़्म अपने
दिखाता सारे जहाँ को हूँ पर अपनों को नहीं मैं

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अपने दीवाने को देकर दर्द ओ ग़म
नाज़ ख़ुद पे किस क़दर करता है वो

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दर्द-ओ-गम से हटा ली गई ज़िन्दगी
मुश्किलों से निकाली गई ज़िन्दगी

फिर किसी रोज़ तुम सेे मोहब्बत हुई
फिर न हम सेे संभाली गई ज़िन्दगी

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मुहब्बत ये मुहब्बत वो मुहब्बत
सिवाए दर्द-ओ-ग़म के कुछ नहीं है

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हम आज राह-ए-तमन्ना में जी को हार आए
न दर्द-ओ-ग़म का भरोसा रहा न दुनिया का

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दर्द-ओ-ग़म एक ऐसा वाक्यांश है जो मानव पीड़ा की गहरी गहराइयों को समेटे हुए है। यह दर्द के सार्वभौमिक अनुभव और इसके द्वारा हृदय पर डाले गए उदासीन छायाओं की बात करता है। कविता में, यह अक्सर मानव स्थिति के गहरे, अधिक आत्मनिरीक्षण पहलुओं की खोज के लिए एक माध्यम के रूप में कार्य करता है।

कवि अक्सर 'दर्द-ओ-ग़म' का उपयोग हानि, लालसा, और अस्तित्वगत निराशा के विषयों में गहराई से जाने के लिए करते हैं। यह एक ऐसा वाक्यांश है जो दिल के दर्द और आत्मा की मौन चीखों के साथ गूंजता है।

दर्द-ओ-ग़म, अपनी काव्यात्मक गूंज में, स्थायी मानव आत्मा का प्रमाण है। यह हमें साझा पीड़ा में पाई जाने वाली सुंदरता की याद दिलाता है।