Meaning of

दरगाह

dargaah • درگاہ

मज़ार; समाधि

shrine; tomb

مزار; مقبرہ

Persian

मैं अब भी बंदरगाहों के चक्कर लगाता रहता हूँ
कितनी मुद्दत बीत गई है साहिल छोड़े हुए तुम्हें

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छोड़ो दुनिया की परवाहें, करो मोहब्बत
मुश्किल हों कितनी भी राहें, करो मोहब्बत

सुन कर देखो सारे मंदिर यही कहेंगे
यही कहेंगी सब दरगाहें, करो मोहब्बत

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नबी का घर अगर कोई नहीं है
बता मुझ को कि डर कोई नहीं है

उड़ा दरगाह की चादर हवा में
बता मौला का दर कोई नहीं है

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दरगाह भी जाती है वो, मंदिर भी जाती है
उस मह-ज़बीं ने अब मुझे इंसान कर दिया

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तुम्हारे क़दमों को जब चूमती हूँ लगता है ऐसा
कोई जोगन किसी दरगाह की चौखट को चू
में है

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दरगाहों पर चढ़ने हैं या मंदिर में
फूल नहीं खिलते हैं इस तैयारी से

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शिप कोई भी तो ले लो कहीं से 'हैदर'
मेरे दिल को बन्दरगाह करने वाले

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मैं अब भी बंदरगाहों के चक्कर लगाता रहता हूँ
कितनी मुद्दत बीत गई है साहिल छोड़े हुए तुम्हें

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छोड़ो दुनिया की परवाहें, करो मोहब्बत
मुश्किल हों कितनी भी राहें, करो मोहब्बत

सुन कर देखो सारे मंदिर यही कहेंगे
यही कहेंगी सब दरगाहें, करो मोहब्बत

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मूल रूप से, 'दरगाह' एक पवित्र स्थान को दर्शाता है, अक्सर एक पूजनीय व्यक्ति की समाधि। यह आध्यात्मिक शरण और दिव्य उपस्थिति की भावना को जागृत करता है, एक ऐसा स्थान जहाँ सांसारिक और शाश्वत का मिलन होता है।

कवि 'दरगाह' का उपयोग आध्यात्मिकता, भक्ति और आंतरिक शांति की खोज के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह प्रबोधन की यात्रा या सांसारिक उथल-पुथल से एक आश्रय का प्रतीक हो सकता है।

कविता के क्षेत्र में, 'दरगाह' दिव्य के साथ संबंध की मानव लालसा का प्रमाण है।