सो नासमझी हमारी उनको नासमझी नहीं लगती
वो जिनको ग़लती अपनी तो कभी ग़लती नहीं लगती
ये जुमला कहने में शायदस उस का कुछ नहीं लगता
मैं सब कुछ लगती हूँ उसकी मगर कुछ भी नहीं लगती
अगर लग जाए दिल पे बात तो उनके ही लगती है
हमें तो उनके मुँह से गाली भी गाली नहीं लगती
दिलों में आग पहले से ही भड़का रक्खी है हमने
किसी झगड़े को भड़काने में चिंगारी नहीं लगती
नज़र जाए जहाँ तक बस उदासी ही उदासी है
उदासी इतनी है फिर भी मुझे काफ़ी नहीं लगती
ये रस्सी 'इश्क़ की है जो न मरने दे न जीने दे
मैं कब से लटकी हूँ इस सेे मुझे फाँसी नहीं लगती
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