
हँसते हुए वो मुझ सेे जुदा कैसे हो गया
नुक़सान में किसी का नफ़ा कैसे हो गया
ख़ुश क़िस्मती पे अपनी मुझे शक सा होता था
इतना हसीन शख़्स मेरा कैसे हो गया
— Firdous khan
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