@Firdouskhan21
Firdous khan shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Firdous khan's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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इस वतन में छोटी सी बुलबुल के हूँ मानिंद मैं
मेरा मज़हब कुछ भी हो पर हूँ तो सारा हिंद मैं
दूसरा पेड़ हरा रखने में मुरझाए ख़ुद
एक ही शख़्स जो इक रिश्ते में झुकता जाए
फूल हो जैसे कोई ऐसा है लहजा उसका
फूल भी ऐसा कि पत्थर में दरार आ जाए
मैं माँगू वक़्त नोटों सा तू चिल्लड़ सा थमा जाए
तेरी ख़ैरात में अपना गुज़ारा हो नहीं सकता
हँसते हुए वो मुझसे जुदा कैसे हो गया
नुक़सान में किसी का नफ़ा कैसे हो गया
ख़ुश क़िस्मती पे अपनी मुझे शक सा होता था
इतना हसीन शख़्स मेरा कैसे हो गया
तुम्हारे क़दमों को जब चूमती हूँ लगता है ऐसा
कोई जोगन किसी दरगाह की चौखट को चूमे है
मुझे तुम फूल देते हो मेरे किस काम के हैं ये
है सुन्दर पर महक इनमें तुम्हारी तो नहीं आती
वो डर जाता है इक मासूम बच्चे की तरह बिलकुल
मैं जब भी ख़्वाब में उसको अकेला छोड़ जाती हूँ
सब फूल क्यों उदास थे ये क्या पता तुम्हें
क़िस्मत तो है गुलाब की उसने छुआ तुम्हें
सुनो जानाँ तुम्हारे लब पे मय का एक भी क़तरा
मेरी आँखों की है तौहीन और नाकाबिल-ए-बर्दाश्त
जले जाते है ये दीपक दिवाली में के जैसे मैं
जली जाती हूँ जब भी तुम दिवाली पर नहीं होते
तुम्हारा फ़ोन ख़ुद काटूँ तो ये महसूस होता है
कि जैसे आख़िरी साँसों को गिनते ख़ुदकुशी कर ली
ज़ख़्म खाते खाते छोड़ा साथ दम ने माज़रत
इश्क़ करने की ख़ता कर ली थी हमने माज़रत
सर पटक कर चीख़ता है दर्द मेरा हर घड़ी
देख मुझको कह दिया है ख़ुद ही ग़म ने माज़रत
यूँ तेरी राह तकते तकते सुन
मेरी आँखों में पड़ गए जाले
अबके बारिश कहीं मेरी छत से
तेरा एहसास ही न धो डाले