दूसरा पेड़ हरा रखने में मुरझाए ख़ुद एक ही शख़्स जो इक रिश्ते में झुकता जाएफूल हो जैसे कोई ऐसा है लहजा उस काफूल भी ऐसा कि पत्थर में दरार आ जाए— Firdous khan