Meaning of

दोज़ख

dozkh • دوزخ

नरक; यातना

hell; torment

جہنم; عذاب

Persian

रूह ने जो अज़िय्यत झेली है इस ज़ीस्त फ़ानी में
फ़र्क़ पड़ता नहीं, दोज़ख़ में भी अब फेंक दे गर तू

1

Download Image

उन से दोज़ख़ में पूछ बैठा हूँ
शैख़ जी आप और यहाँ कैसे

7

Download Image

बच्चों को मालूम है दुनिया दोज़ख है
पैदा होते ही सब रोने लगते हैं

6

Download Image

जाने वाले कह पाते तो कहते आने वालों से
दुनिया दोज़ख़ जैसी ही है बस में हो तो मत आना

6

Download Image

बस वही लोग जन्नती होंगे
और सारे ही दोज़ख़ी होंगे

3

Download Image

तब जा के कहीं ज़ाबित-ओ-मज़बूत हुए हैं
हम साल कई आतिश-ए-दोज़ख़ में जले हैं

3

Download Image

मैं तो बस इक सफ़र का ही परिंदा हूँ
सफ़र के ख़त्म होने तक ही ज़िंदा हूँ

मुझे तुम ख़्वाब जन्नत के दिखाओ मत
मैं दोज़ख़ से निकाला इक दरिंदा हूँ

3

Download Image

उसे जन्नत कहाँ से रास आए
जिसे दोज़ख़ की आदत लग चुकी है

2

Download Image

किसे जन्नत मिलेगी या किसे दोज़ख़ मिलेगा
इसे भी तय ज़मीं पर रहने वाले कर रहे हैं

2

Download Image

हम ने जन्नत इन्हें दिखाई थी
और दोज़ख में पड़ रहे हैं लोग

हम हैं 'रिज़वाँ' बनी अबू-तालिब
हम से सदियों से लड़ रहे हैं लोग

2

Download Image

रूह ने जो अज़िय्यत झेली है इस ज़ीस्त फ़ानी में
फ़र्क़ पड़ता नहीं, दोज़ख़ में भी अब फेंक दे गर तू

1

Download Image

उन से दोज़ख़ में पूछ बैठा हूँ
शैख़ जी आप और यहाँ कैसे

7

Download Image

'दोज़ख' का मूल अर्थ एक अग्निमय गर्त है, जहाँ अनंत पीड़ा और दंड का अनुभव होता है। कविता में, यह आत्मा के आंतरिक संघर्षों और पीड़ाओं का प्रतीक बन जाता है, भावनात्मक और आध्यात्मिक यातना का रूपक।

कवि अक्सर 'दोज़ख' का उपयोग निराशा की गहराइयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह स्वर्गीय छवियों के विपरीत होता है, मानव अनुभव की द्वैतता को उजागर करता है। यह व्यक्तिगत नरक का भी विचार प्रस्तुत कर सकता है, जो प्रत्येक व्यक्ति की पीड़ा के लिए अद्वितीय होता है।

कविता में, 'दोज़ख' आत्मा के सबसे अंधेरे कोनों का प्रतिबिंब बन जाता है। यह आत्मनिरीक्षण और भीतर की अनदेखी लड़ाइयों के प्रति सहानुभूति को आमंत्रित करता है।