Meaning of

फ़ना

fana • فنا

विलय; नाश; आत्म-विसर्जन

annihilation; extinction; self-dissolution

فنا; نیستی; خود کو مٹانا

Arabic

निकलते हैं कफ़न बांधे फ़ना होने की निय्यत से
के संग एक ही उछालेंगे मगर अब के तबीअत से

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शायद क़ज़ा ने मुझ को ख़ज़ाना बना दिया
ऐसा नहीं तो क्यूँँ मुझे दफ़ना रहे हैं लोग

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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मुझे फ़ना कर दे
फ़ना भी ऐसा कि जिस की कोई मिसाल न हो

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इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना

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तलाश हम को किसी भी बदन की है ही नहीं
हवस की भूख हमारे ज़ेहन की है ही नहीं

किसी से बिछड़े तो कोई फ़ना नहीं होता
क़ज़ा की बात तो अब के ज़मन की है ही नहीं

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ये सोचके तो दूसरी कोई मिट्टी को छु'आ नहीं
के बा'द मरने के हिन्दुस्तां में दफनाया जाऊँगा

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जिस बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है
उस को दफ़नाओ मिरे हाथ की रेखाओं में

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मैं ने दफ़नाये वालिदैन अपने
मुझ से पूछो कि हौसला क्या है

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उसे मेरे शेर-ओ-फ़न से जाने क्यूँँ इतनी वहशत है
पहले ग़ज़लें दफ़्न करेगा फिर मुझ को दफ़नाएगा

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ऐ मौज-ए-हवादिस तुझे मालूम नहीं क्या
हम अहल-ए-मोहब्बत हैं फ़ना हो नहीं सकते

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निकलते हैं कफ़न बांधे फ़ना होने की निय्यत से
के संग एक ही उछालेंगे मगर अब के तबीअत से

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शायद क़ज़ा ने मुझ को ख़ज़ाना बना दिया
ऐसा नहीं तो क्यूँँ मुझे दफ़ना रहे हैं लोग

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मूल रूप में 'फ़ना' का अर्थ है आत्म का पूर्ण विलय, स्रोत में वापसी। कविता में, यह अक्सर अहंकार के गहन समर्पण को दर्शाता है, प्रिय या दिव्य के साथ विलय, व्यक्तिगत अस्तित्व की सीमाओं को पार करना।

'फ़ना' का उपयोग कवि प्रेम में अंतिम बलिदान व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रेमी की इच्छा को दर्शाता है कि वे प्रिय में पूरी तरह से खो जाएं। यह 'बक़ा' के विपरीत है, जो शाश्वत अस्तित्व को दर्शाता है।

'फ़ना' प्रेम के अंतिम समर्पण का सार पकड़ता है। यह आत्म से निःस्वार्थता की यात्रा है।