Meaning of

फ़रह

farh • فرح

खुशी; आनंद; प्रसन्नता

joy; happiness; delight

خوشی; مسرت; شادمانی

Arabic

याद आई जब मुझे 'फ़रहत' से छोटी थी बहन
मेरे दुश्मन की बहन ने मुझ को राखी बाँध दी

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मैं पर्वतों से लड़ता रहा और चंद लोग
गीली ज़मीन खोद के फ़रहाद हो गए

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देखा न कोहकन कोई फ़रहाद के बग़ैर
आता नहीं है फ़न कोई उस्ताद के बग़ैर

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इसी से होता है ज़ाहिर जो हाल दर्द का है
सभी को कोई न कोई वबाल दर्द का है

किसी ने पूछा के 'फ़रहत' बहुत हसीन हो तुम
तो मुस्कुरा के कहा सब जमाल दर्द का है

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इश्क़ क़ैस फ़रहाद रोमियो जैसे ही कर सकते हैं
हम तो ठहरे दस से छह तक ऑफ़िस जाने वाले लोग

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किसी के इश्क़ में बर्बाद होना
हमें आया नहीं फ़रहाद होना

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वो चाहे मजनूँ हो, फ़रहाद हो कि राँझा हो
हर एक शख़्स मेरा हम सबक़ निकलता है

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बस एक लम्हे के सच झूट के एवज़ 'फ़रहत'
तमाम उम्र का इल्ज़ाम ले गया मुझ से

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है दसहरे में भी यूँँ गर फ़रहत-ओ-ज़ीनत 'नज़ीर'
पर दिवाली भी अजब पाकीज़ा-तर त्यौहार है

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मेरे संग-ए-मज़ार पर फ़रहाद
रख के तेशा कहे है या उस्ताद

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याद आई जब मुझे 'फ़रहत' से छोटी थी बहन
मेरे दुश्मन की बहन ने मुझ को राखी बाँध दी

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मैं पर्वतों से लड़ता रहा और चंद लोग
गीली ज़मीन खोद के फ़रहाद हो गए

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'फ़रह' अपने मूल अर्थ में एक शुद्ध और निर्मल खुशी को दर्शाता है, एक ऐसी प्रसन्नता जो शांत और गहरी होती है। कविता में यह भावना अक्सर गहराई से व्यक्त की जाती है, जहाँ खुशी की क्षणभंगुरता, दुःख के साथ उसका विरोधाभास, और मानव अनुभव में आनंद के क्षणिक पलों को पकड़ा जाता है।

कवि अक्सर 'फ़रह' का उपयोग उथल-पुथल के बीच आनंद के क्षणों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह जीवन की क्षणिक सुंदरता की याद दिलाता है। इस शब्द को दुःख के साथ रखा जा सकता है ताकि मानव भावनाओं की द्वैतता को उजागर किया जा सके।

'फ़रह' उस खुशी का सार पकड़ता है जो क्षणिक और शाश्वत दोनों है, एक नाजुक संतुलन जिसे कविता संरक्षित करने का प्रयास करती है।