Meaning of

फ़रिश्ता

farishta • فرشتہ

देवदूत; दिव्य प्राणी

angel; divine being

فرشتہ; الہی مخلوق

Persian

न मैं कोई फ़रिश्ता न परवरदिगार हूँ
अदना सा शख़्स हूँ या कहूँ ख़ाकसार हूँ

लाओ तुम अपना राहरों दुख मुझ सेे बाँट लो
मैं भी तुम्हारी तरह गरीबुद्दयार हूँ

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ख़ुदा बचाए तिरी मस्त मस्त आँखों से
फ़रिश्ता हो तो बहक जाए आदमी क्या है

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मुझ को छाँव में रखा और ख़ुद भी वो जलता रहा
मैं ने देखा इक फ़रिश्ता बाप की परछाईं में

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तारीकियाँ हैं साथ मिरे और सफ़र मुदाम
कल तक था हम-क़दम जो फ़रिश्ता किधर गया

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मेरे दर्द की वो दवा है मगर
मेरा उस सेे कोई भी रिश्ता नहीं

मुसलसल मिलाता है मुझ सेे नज़र
मैं कैसे कहूँ वो फ़रिश्ता नहीं

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कौन कहता है कि हर शख़्स फ़रिश्ता हो जाए
आदमी थोड़ा तो इंसान के जैसा हो जाए

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था मैं अय्यार भी वादा-शिकन बस उस से उल्फ़त थी
मगर वो तो फ़रिश्ता था उसे सब से मुहब्बत थी

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मैं ज़मीं पर भी फ़रिश्ता देखता हूँ
जब किसी बच्चे को हँसता देखता हूँ

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दौलते दुनिया के पीछे चल रहा है हर बशर
हर बशर के पीछे लेकिन है फरिश्ता मौत का

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उन का आज रिश्ता आया है
मौत का फ़रिश्ता आया है

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न मैं कोई फ़रिश्ता न परवरदिगार हूँ
अदना सा शख़्स हूँ या कहूँ ख़ाकसार हूँ

लाओ तुम अपना राहरों दुख मुझ सेे बाँट लो
मैं भी तुम्हारी तरह गरीबुद्दयार हूँ

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ख़ुदा बचाए तिरी मस्त मस्त आँखों से
फ़रिश्ता हो तो बहक जाए आदमी क्या है

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'फ़रिश्ता' शब्द पवित्रता और दिव्य अनुग्रह की छवियाँ उत्पन्न करता है। कविता में, यह अक्सर अच्छाई और मासूमियत के आदर्श का प्रतिनिधित्व करता है, एक ऐसा प्राणी जो नश्वर दुनिया की खामियों से अछूता है।

कवि 'फ़रिश्ता' का उपयोग प्रिय की पवित्रता का वर्णन करने या मानव की त्रुटियों के विपरीत करने के लिए करते हैं। यह आशा और सुरक्षा का प्रतीक भी हो सकता है, एक स्वर्गीय रक्षक जो सांसारिक संघर्षों पर नज़र रखता है।

काव्यिक क्षेत्रों में, 'फ़रिश्ता' मानव आत्मा के भीतर पवित्रता और दिव्यता की अनंत खोज को मूर्त रूप देता है।