Meaning of

फ़िक्र

fikr • فکر

चिंता; फिक्र; विचार

worry; concern; thought

فکر; تشویش; خیال

Arabic

थी वस्ल में भी फ़िक्र-ए-जुदाई तमाम शब
वो आए तो भी नींद न आई तमाम शब

31

Download Image

करता नहीं ख़याल तेरा इस ख़याल से
तंग आ गया अगर तू मेरी देखभाल से

चल मेरे साथ और तबीयत की फ़िक्र छोड़
दो मील दूर है मेरा घर अस्पताल से

158

Download Image

वो मेरी फिक्र तो करता है मगर प्यार नहीं
या'नी पाज़ेब में घुँघरू तो है झंकार नहीं

53

Download Image

निगाह-ए-गर्म क्रिसमस में भी रही हम पर
हमारे हक़ में दिसम्बर भी माह-ए-जून हुआ

47

Download Image

दुनिया की फ़िक्र छोड़, न यूँँ अब उदास बैठ
ये वक़्त रब की देन है, अम्मी के पास बैठ

47

Download Image

फ़िक्र-ए-ईजाद में गुम हूँ मुझे ग़ाफ़िल न समझ
अपने अंदाज़ पर ईजाद करूँँगा तुझ को

46

Download Image

मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया
हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया

41

Download Image

फ़िक्र करता ही नहीं अब, याद रहता है यही
कुछ भी अच्छा या बुरा हो, सोचते बस हैं तुझे

37

Download Image

कभी तुझ सेे मिलेंगे तो कहेंगे झूठ तुझ सेे हम
न तेरी फ़िक्र करते हैं न तुझ को याद करते हैं

36

Download Image

जि
यूँँगी किस तरह तेरे बिना मत फिक्र कर इस की
गुज़रती जिस शहर से हूँ दिवाने छोड़ आती हूँ

33

Download Image

थी वस्ल में भी फ़िक्र-ए-जुदाई तमाम शब
वो आए तो भी नींद न आई तमाम शब

31

Download Image

करता नहीं ख़याल तेरा इस ख़याल से
तंग आ गया अगर तू मेरी देखभाल से

चल मेरे साथ और तबीयत की फ़िक्र छोड़
दो मील दूर है मेरा घर अस्पताल से

158

Download Image

मूल रूप से 'फ़िक्र' मानसिक व्यस्तता या चिंता की स्थिति को दर्शाता है। कविता में, यह केवल चिंता तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जीवन की अनिश्चितताओं और मानव स्थिति पर गहन चिंतन बन जाता है।

कवि अक्सर 'फ़िक्र' का उपयोग अस्तित्वगत भय, अनकहे विचारों के बोझ, और आत्मा द्वारा उठाए गए मौन भार की खोज के लिए करते हैं।

कविता में, 'फ़िक्र' मानव मन की गहराइयों को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण बन जाता है।