Meaning of

फ़िराक़े-यार

firaq-e-yaar • فراق یار

प्रिय से वियोग; प्रिय की लालसा

separation from the beloved; longing for the beloved

فراق یار; محبوب کی تمنا

Persian

चराग़-ए-अश्क हैं दहलीज़-ए-चश्म पर रौशन
फ़िराक़-ए-यार की मज्लिस है क़ल्ब-ए-मुज़्तर में

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फ़िराक़-ए-यार ने बेचैन मुझ को रात भर रक्खा
कभी तकिया इधर रक्खा कभी तकिया उधर रक्खा

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अब की होली में रहा बे-कार रंग
और ही लाया फ़िराक़-ए-यार रंग

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यूँँ तो फ़िराक़-ए-यार में क्या क्या नहीं किया
लेकिन तुम्हारे जैसा तमाशा नहीं किया

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विसाल-ए-यार में जीना कोई कमाल नहीं
फिराक़-ए-यार में जीना कमाल होता है

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तुम को फ़िराक-ए-यार ने मिस्मार कर दिया
मुझ को फ़िराक-ए-यार ने फ़नकार कर दिया

गुल से मुतालिबा जो किया बोसे का शजर
गुल ने हिला के पत्तियाँ इनकार कर दिया

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अजीब हाल है मेरा फ़िराक़-ए-यार के बा'द
खुली फ़ज़ाओ में घुट-घुट के मर रहा हूँ मैं

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चराग़-ए-अश्क हैं दहलीज़-ए-चश्म पर रौशन
फ़िराक़-ए-यार की मज्लिस है क़ल्ब-ए-मुज़्तर में

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फ़िराक़-ए-यार ने बेचैन मुझ को रात भर रक्खा
कभी तकिया इधर रक्खा कभी तकिया उधर रक्खा

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'फ़िराक़-ए-यार' उस गहरे भावनात्मक उथल-पुथल और लालसा को समेटे हुए है जो प्रिय से वियोग के साथ होती है। यह एक ऐसी लालसा की स्थिति है जहाँ दिल प्रिय की उपस्थिति के लिए तरसता है, और अनुपस्थिति का हर क्षण एक अनंत काल जैसा लगता है।

कविता में, 'फ़िराक़-ए-यार' का उपयोग अक्सर उस गहरे दुख और लालसा को व्यक्त करने के लिए किया जाता है जो प्रेमी वियोग में अनुभव करते हैं। यह अधूरी इच्छाओं और दूरी के दर्द के सार को पकड़ता है। कवि इसका उपयोग सहानुभूति जगाने और प्रेम और हानि की गहराई का पता लगाने के लिए करते हैं।

कविता के क्षेत्र में, 'फ़िराक़-ए-यार' प्रेम की स्थायी शक्ति और वियोग के अनिवार्य दर्द की एक मार्मिक याद दिलाता है।