Meaning of

फ़िशाँ

fishaan • فشاں

बिखराव; फैलाव; प्रसार

scattering; dispersing; spreading

بکھراؤ; پھیلاؤ; اشاعت

Persian

इस मजलिस-ए-मातम पे ज़र-अफ़्शाँ कफ़न मत रख बशर
मौज़ाअ में चलते हैं कपड़े पाक मिट्टी में सने

0

Download Image

निकालूँ कैसे मैं दो दिन की ज़िन्दगी में वक़्त
पचास काम मिरे एक दिन में रहते हैं

2

Download Image

इश्क़ की एक कहानी भी है ये ताजमहल
ग़म जुदाई का सुनाती भी है ये ताजमहल

हाथ कटवा दे जो मा'सूम से मज़दूरों के
ख़ूँ-फ़िशानी की निशानी भी है ये ताजमहल

1

Download Image

क्या कहा दर्द के दलदल से निकालूँ तुझ को
तेरा हमदर्द हूँ मैं तेरा ख़ुदा थोड़ी हूँ

1

Download Image

कहाँ कहाँ से उसे निकालूँ कि एक उस का पता नहीं है
है ऐसा कुछ क्या मेरे बदन में जहाँ कभी वो रहा नहीं है

1

Download Image

इस मजलिस-ए-मातम पे ज़र-अफ़्शाँ कफ़न मत रख बशर
मौज़ाअ में चलते हैं कपड़े पाक मिट्टी में सने

0

Download Image

निकालूँ कैसे मैं दो दिन की ज़िन्दगी में वक़्त
पचास काम मिरे एक दिन में रहते हैं

2

Download Image

'फ़िशाँ' मूल रूप से बिखरने या फैलने की क्रिया को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर भावनाओं या विचारों के प्रसार का प्रतीक होता है, जैसे पंखुड़ियों या बीजों का बिखराव, जो सुंदरता और क्षणभंगुरता दोनों का संकेत देता है।

कवि 'फ़िशाँ' का उपयोग क्षणिक सुंदरता और जीवन की क्षणभंगुर प्रकृति की छवि को उभारने के लिए करते हैं। यह प्रेम के कोमल प्रसार या दुःख के अनिवार्य फैलाव का संकेत दे सकता है।

'फ़िशाँ' उपस्थिति और अनुपस्थिति के बीच की नाजुक नृत्य को समेटे हुए है, जीवन के क्षणों की क्षणभंगुर सुंदरता को प्रतिध्वनित करता है।