
इश्क़ की एक कहानी भी है ये ताजमहल
ग़म जुदाई का सुनाती भी है ये ताजमहल
हाथ कटवा दे जो मा'सूम से मज़दूरों के
ख़ूँ-फ़िशानी की निशानी भी है ये ताजमहल
— A R Sahil "Aleeg"
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