Meaning of

हौल

haul • ہول

डर; भय

fear; dread

خوف; ڈر

Arabic

आदमी होता है माहौल से अच्छा या बुरा
जानवर घर में रखे जाएँ तो इंसान से हैं

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चुप रहते हैं चुप रहने दो राज़ बताओ खोले क्या
बात वफ़ा की तुम करती हो बोलो हम कुछ बोले क्या

उल्फ़त तो अफ़साना है तुम करती खूब सियासत हो
हम भी हैं मक़बूल बहुत अब बोल किसी के होलें क्या

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मौत ने सारी रात हमारी नब्ज़ टटोली
ऐसा मरने का माहौल बनाया हम ने

घर से निकले चौक गए फिर पार्क में बैठे
तन्हाई को जगह-जगह बिखराया हम ने

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चारा-गर ऐ चारा-गर चिल्लाती थी
ज़ख़्मों को भी हाथ नहीं लगवाती थी

पता नहीं कैसा माहौल था उस के घर
बुर्का पहन के शर्टें लेने आती थी

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चले भी आओ भुला कर सभी गिले-शिकवे
बरसना चाहिए होली के दिन विसाल का रंग

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ये मयकशों का तवाज़ुन भी क्या तवाज़ुन है
खड़े भी रहना सहूलत से लड़खड़ाना भी

हमारे शहर के लोगों को ख़ूब आता है
किसी को सर पे बिठाना भी और गिराना भी

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तेरी शर्तों पे ही करना है अगर तुझ को क़ुबूल
ये सुहूलत तो मुझे सारा जहाँ देता है

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मैं ज़िंदगी के सभी ग़म भुलाए बैठा हूँ
तुम्हारे इश्क़ से कितनी मुझे सहूलत है

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कहीं पड़े न मोहब्बत की मार होली में
अदास प्रेम करो दिल से प्यार होली में

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जो न खेली होली 'अमृत' के साथ में
हाथों में दीवाली तक गुलाल रहेगा

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आदमी होता है माहौल से अच्छा या बुरा
जानवर घर में रखे जाएँ तो इंसान से हैं

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चुप रहते हैं चुप रहने दो राज़ बताओ खोले क्या
बात वफ़ा की तुम करती हो बोलो हम कुछ बोले क्या

उल्फ़त तो अफ़साना है तुम करती खूब सियासत हो
हम भी हैं मक़बूल बहुत अब बोल किसी के होलें क्या

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हौल शब्द एक गहरे डर का आभास कराता है, जो केवल क्षणिक भय नहीं है, बल्कि आत्मा पर छाया हुआ एक स्थायी भय है। कविता में, यह अक्सर एक प्रबल भावना का सार पकड़ता है, जो दिल को जकड़ लेता है और एक अमिट छाप छोड़ता है।

कवि 'हौल' का उपयोग उस भय की तीव्रता को व्यक्त करने के लिए करते हैं जो साधारण से परे है। इसे अक्सर मौन के क्षणों के साथ रखा जाता है, जिससे एक तीव्र विरोधाभास उत्पन्न होता है। यह शब्द अज्ञात, छाया में छिपी अदृश्य शक्तियों का प्रतीक भी हो सकता है।

कविता के क्षेत्र में, 'हौल' मानव भय की गहराइयों की खोज के लिए एक माध्यम बन जाता है। यह हर प्रकाश के साथ आने वाली छायाओं की याद दिलाता है।