Meaning of

इंक़िलाब

inqilaab • انقلاب

क्रांति; उथल-पुथल; परिवर्तन

revolution; upheaval; transformation

انقلاب; ہلچل; تبدیلی

Arabic

शा'इरी से इंक़िलाब आए तो कैसे
सुन के सब ताली बजाने में लगे हैं


शे'र ‘कर्कश’ कौन महफ़िल में सुनेगा

लोग सारे नाच गाने में लगे हैं

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कोई तो सूद चुकाए कोई तो ज़िम्मा ले
उस इंक़िलाब का जो आज तक उधार सा है

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बहुत बर्बाद हैं लेकिन सदा-ए-इंक़लाब आए
वहीं से वो पुकार उठेगा जो ज़र्रा जहाँ होगा

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शराब खींची है सब ने ग़रीब के ख़ूँ से
तू अब अमीर के ख़ूँ से शराब पैदा कर

तू इंक़लाब की आमद का इंतिज़ार न कर
जो हो सके तो अभी इंक़लाब पैदा कर

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देख रफ़्तार-ए-इंक़लाब 'फ़िराक़'
कितनी आहिस्ता और कितनी तेज़

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इंक़लाब आएगा रफ़्तार से मायूस न हो
बहुत आहिस्ता नहीं है जो बहुत तेज़ नहीं

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जब तक कि आदमी को सुकूँ की तलाश है
सौ इंक़िलाब आएँगे इक इंक़िलाब क्या

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"शहीद-ए-आज़म भगतसिंह"
आँखों में वो आँसू नहीं

कुछ ख़्वाब सँजोया करता था
वतन की आज़ादी के ख़ातिर

खूनी आँसू रोया करता था
आज़ादी का दीवाना था वो

रगों में उबाल ख़ानदानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
अंगारों पर चल कर जिस ने

एक नई राह बनाई थी
उस मतवाले शे'र ने क़सम

आज़ादी की खाई थी
चाहे उम्र कम रही हो लेकिन

वो एक लंबी कहानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
जिस के दिल में सिर्फ़ और सिर्फ़

इन्कलाब की आग थी
आँखों में थी जलती ज्वाला

लिबास जिस का त्याग थी
हर दिल में निशाँ छोड़ गया वो

भारत माँ की निशानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
जब तक धरती-अम्बर होंगे

मिट न सकेगा नाम तुम्हारा
भारत का हर बच्चा-बच्चा

याद रखेगा काम तुम्हारा
समुंदर से भी गहरा था जो

ख़ुद में ही एक रवानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था

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इक इंक़लाब नया आज हो गया है क्या
मुझे ज़माने ने ख़ुद ही बदल दिया है क्या

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फ़क़त ग़ुलामियों का नर्म-सा क़दम है इश्क़ भी
ये बात और है कि नाम इंक़िलाब का दिया

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शा'इरी से इंक़िलाब आए तो कैसे
सुन के सब ताली बजाने में लगे हैं


शे'र ‘कर्कश’ कौन महफ़िल में सुनेगा

लोग सारे नाच गाने में लगे हैं

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कोई तो सूद चुकाए कोई तो ज़िम्मा ले
उस इंक़िलाब का जो आज तक उधार सा है

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मूल रूप से, 'इंक़िलाब' का अर्थ गहरी परिवर्तन से है, जो अक्सर राजनीतिक या सामाजिक उथल-पुथल से जुड़ा होता है। कविता में, यह उथल-पुथल भरी भावनाओं और परिवर्तन के जोश को दर्शाता है, चाहे वह समाज में हो या मानव हृदय में।

'इंक़िलाब' का उपयोग कवि अक्सर विद्रोह और परिवर्तन की भावना को जगाने के लिए करते हैं। यह पुराने मानदंडों के टूटने या नई चेतना के जागरण का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द व्यक्तिगत और सामूहिक संघर्षों के साथ गूंजता है।

इंक़िलाब परिवर्तन के सार को समेटे हुए है, जीवन और समाज की निरंतर विकसित होती प्रकृति की याद दिलाता है।