Meaning of

इंतेहा

inteha • انتہا

अंत; सीमा

end; limit

اختتام; حد

Arabic

आग थे इब्तिदा-ए-इश्क़ में हम
अब जो हैं ख़ाक इंतिहा है ये

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इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं
दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बा'द

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याद उसे इंतिहाई करते हैं
सो हम उस की बुराई करते हैं

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फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था
वो मुझ से इंतिहाई ख़ुश ख़फ़ा होने से पहले था

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सच घटे या बढ़े तो सच न रहे
झूट की कोई इंतिहा ही नहीं

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तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ
मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ

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कहीं ये अपनी मोहब्बत की इंतिहा तो नहीं
बहुत दिनों से तिरी याद भी नहीं आई

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इब्तिदा वो थी कि जीना था मोहब्बत में मुहाल
इंतिहा ये है कि अब मरना भी मुश्किल हो गया

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इश्क़ तिरी इंतिहा इश्क़ मिरी इंतिहा
तू भी अभी ना-तमाम मैं भी अभी ना-तमाम

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न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम
रहा ये वहम कि हम हैं सो वो भी क्या मालूम

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आग थे इब्तिदा-ए-इश्क़ में हम
अब जो हैं ख़ाक इंतिहा है ये

20

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इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं
दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बा'द

49

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'इंतेहा' किसी निष्कर्ष या सीमा तक पहुँचने का विचार व्यक्त करता है। कविता में, यह अक्सर भावनाओं के चरम, अनुभव की चोटी, या क्षण की अंतिमता को दर्शाता है।

कवि 'इंतेहा' का उपयोग भावनाओं की गहराई की खोज के लिए करते हैं। यह यात्रा के अंत, प्रेम की सीमाओं, या मानव अनुभव की सीमाओं का संकेत दे सकता है।

'इंतेहा' दिल की सीमाओं के साथ टकराव को व्यक्त करता है, जीवन की सीमित प्रकृति की एक मार्मिक याद दिलाता है।