Meaning of

इंतिहाँ

intihaan • انتہا

चरम; सीमा; पराकाष्ठा

extreme; limit; culmination

انتہا; حد; عروج

Arabic

आग थे इब्तिदा-ए-इश्क़ में हम
अब जो हैं ख़ाक इंतिहा है ये

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इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं
दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बा'द

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याद उसे इंतिहाई करते हैं
सो हम उस की बुराई करते हैं

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फ़रिश्तों से भी अच्छा मैं बुरा होने से पहले था
वो मुझ से इंतिहाई ख़ुश ख़फ़ा होने से पहले था

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सच घटे या बढ़े तो सच न रहे
झूट की कोई इंतिहा ही नहीं

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तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूँ
मिरी सादगी देख क्या चाहता हूँ

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कहीं ये अपनी मोहब्बत की इंतिहा तो नहीं
बहुत दिनों से तिरी याद भी नहीं आई

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इब्तिदा वो थी कि जीना था मोहब्बत में मुहाल
इंतिहा ये है कि अब मरना भी मुश्किल हो गया

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इश्क़ तिरी इंतिहा इश्क़ मिरी इंतिहा
तू भी अभी ना-तमाम मैं भी अभी ना-तमाम

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न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम
रहा ये वहम कि हम हैं सो वो भी क्या मालूम

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आग थे इब्तिदा-ए-इश्क़ में हम
अब जो हैं ख़ाक इंतिहा है ये

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इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं
दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बा'द

49

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मूल रूप में 'इंतिहाँ' का अर्थ किसी चीज़ की चरम सीमा या शिखर होता है। कविता में, यह अक्सर भावनाओं या अनुभवों के उस अंतिम बिंदु का प्रतीक होता है, जहाँ भावनाएँ अपनी पराकाष्ठा पर पहुँच जाती हैं।

'इंतिहाँ' का उपयोग कवि प्रेम, दुःख, या तड़प की चरम सीमा को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह यात्रा की अंतिमता या भावनात्मक चाप के चरमोत्कर्ष को दर्शा सकता है।

'इंतिहाँ' साधारण से परे पहुँचने का सार पकड़ता है, जहाँ भावनाएँ अनंत के क्षेत्र में प्रवेश करती हैं।