Meaning of

इस्म

ism • اسم

नाम; पहचान

name; identity

نام; شناخت

Arabic

ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता

67

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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो
तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो

मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ
मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो

295

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बात ही कब किसी की मानी है
अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी

ये कलाई ये जिस्म और ये कमर
तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी

162

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मोहब्बत अपनी क़िस्मत में नहीं है
इबादत से गुज़ारा कर रहे है

115

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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने
तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने

मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ
लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने

107

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तुम ने कैसे उस के जिस्म की ख़ुशबू से इनकार किया
उस पर पानी फेंक के देखो कच्ची मिट्टी जैसा है

102

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जब भी उस की गली में भ्रमण होता है
उस के द्वार पर आत्मसमर्पण होता है

किस किस से तुम दोष छुपाओगे अपने
प्रिये अपना मन भी दर्पण होता है

84

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तिलिस्म-ए-यार ये पहलू निकाल लेता है
कि पत्थरों से भी ख़ुशबू निकाल लेता है

है बे-लिहाज़ कुछ ऐसा की आँख लगते ही
वो सर के नीचे से बाजू निकाल लेता है

77

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सितारे और क़िस्मत देख कर घर से निकलते हैं
जो बुज़दिल हैं मुहूरत देख कर घर से निकलते हैं

हमें लेकिन सफ़र की मुश्किलों से डर नहीं लगता
कि हम बच्चों की सूरत देख कर घर से निकलते हैं

74

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रंग-ओ-रस की हवस और बस
मसअला दस्तरस और बस

यूँँ बुनी हैं रगें जिस्म की
एक नस टस से मस और बस

71

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ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता

67

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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो
तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो

मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ
मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो

295

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शब्द 'इस्म' केवल एक नाम से अधिक को दर्शाता है; यह पहचान और सार का प्रतीक है। अपने मूल अर्थ में, यह उस लेबल को संदर्भित करता है जिससे कोई जाना जाता है। कविता ने इसे आत्म की गहराई और व्यक्तिगत और सांस्कृतिक पहचान की परतों का पता लगाने के लिए विस्तारित किया है।

कवि 'इस्म' का उपयोग पहचान की जटिलताओं में गहराई से जाने के लिए करते हैं। यह किसी के दिए गए नाम और उस आत्म के बीच संघर्ष का प्रतीक हो सकता है जिसे कोई बनना चुनता है। यह शब्द अक्सर सामाजिक लेबल और व्यक्तिगत सत्य के बीच तनाव को दर्शाता है।

कविता के क्षेत्र में, 'इस्म' हमें यह सोचने के लिए आमंत्रित करता है कि हम कौन हैं। यह हमें उन नामों पर विचार करने की चुनौती देता है जिन्हें हम धारण करते हैं और उन पहचानों को जिन्हें हम गढ़ते हैं।