Meaning of

जान-ऐ-मन

jaan-ai-man • جان من

मेरे मन का प्रिय; प्रियतम

beloved of my soul; dear one

میرے دل کا محبوب; پیارا

Persian

जान-ए-मन तुम वबाल करती हो
लाल में भी कमाल करती हो

जब पहन लेती लाल जोड़ा तुम
फिर तो जीना मुहाल करती हो

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बस मोहब्बत बस मोहब्बत बस मोहब्बत जान-ए- मन
बाक़ी सब जज़्बात का इज़हार कम कर दीजिए

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गले मुझ को लगा लो ऐ मेरे दिलदार होली में
बुझे दिल की लगी भी तो ऐ मेरे यार होली में

गुलाबी गाल पर कुछ रंग मुझ को भी जमाने दो
मनाने दो मुझे भी जान-ए-मन त्यौहार होली में

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दुनिया के चक्कर में मुझ को भूली हो
अब दुनिया से टकराओगी जान-ए-मन

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जान-ए-मन मैं आइनों में भी तुम्हारा रूप
देखता जो हूँ कभी तो इल्तिजा के साथ

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धर्म से जोड़ा गया है जाति में तोला गया है
आदमी को जान-ए-मन कब आदमी समझा गया है

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जान-ए-मन तुझ सेे मोहब्बत है मोहब्बत की क़सम
राँझा-ओ-क़ैस की फ़रहाद की चाहत की क़सम

ख़ुद से बढ़कर तुझे चाहा था तुझे चाहूँगा
ऐ मेरी जान तेरी इज़्ज़त-ओ-अज़मत की क़सम

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जान-ए-जाँ जान-ए-वफ़ा जान-ए-जिगर जान-ए-हज़ी
जान-ए-मन जान-ए-तमन्ना तेरी आँखों के निसार

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और तो न देंगे कोई दलील जान-ए-मन
ये मु'आमला भी हम छोड़ते हैं अब तुम पर

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मैं तुम्हें भूलने की कोशिश में
जान-ए-मन ख़ुद को भूल बैठा हूँ

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जान-ए-मन तुम वबाल करती हो
लाल में भी कमाल करती हो

जब पहन लेती लाल जोड़ा तुम
फिर तो जीना मुहाल करती हो

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बस मोहब्बत बस मोहब्बत बस मोहब्बत जान-ए- मन
बाक़ी सब जज़्बात का इज़हार कम कर दीजिए

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जान-ऐ-मन गहरे स्नेह और अंतरंग संबंध की कोमल अभिव्यक्ति है। यह प्रिय निकटता और प्रेमियों के बीच गहरे बंधन की भावना को व्यक्त करता है। कविता में, यह अक्सर प्रिय को व्यक्ति के अस्तित्व के अभिन्न अंग के रूप में दर्शाता है, जो आनंद और सांत्वना का स्रोत है।

कवि जान-ऐ-मन का उपयोग प्रेम की गर्माहट और भावनात्मक संबंधों की गहराई को व्यक्त करने के लिए करते हैं। इसका उपयोग अक्सर लालसा और भक्ति को व्यक्त करने के लिए किया जाता है, प्रिय को हृदय के आश्रय के रूप में चित्रित करता है। यह वाक्यांश ऐसे अंतरंग संबंधों में पाई जाने वाली नाजुकता और शक्ति को भी उजागर कर सकता है।

जान-ऐ-मन प्रेम के कोमल आलिंगन का सार समेटे हुए है, हृदय की स्थायी संबंध क्षमता का प्रमाण।