मुझ बिन आधी रह जाओगी जान-ए-मन
ख़ुद को तिल तिल तड़पाओगी जान-ए-मन
दीवारों से बात करोगी फिर तुम भी
आईने सी हो जाओगी जान-ए-मन
देखा तुमने देखा मैं ना कहता था?
छोड़ मुझे तुम पछताओगी जान-ए-मन
महफ़िल में ग़र मेरा ज़िक्र कभी होगा
मुझको अपना बतलाओगी जान-ए-मन
मेरा चाहे कोई शे’र उठा लेना
जान-ए-मन को ही पाओगी जान-ए-मन
पहले सा आसान नहीं हूँ जाओ भी
तुम मुश्किल में आजाओगी जान-ए-मन
बेहतर है मुझ सेे नफ़रत ही करना तुम
प्यार करोगी मर जाओगी जान-ए-मन
दुनिया के चक्कर में मुझको भूली हो
अब दुनिया से टकराओगी जान-ए-मन
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