Meaning of

जाविदाँ

jaavidaan • تاریکی

अनन्त; शाश्वत

eternal; everlasting

ابدی; دائمی

Persian

किस को पता था मैं हूँ तारीकी-ए-मिज़ाज
किस ने दिए को ला के चौखट पे रख दिए

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चले जाओ मगर इतनी मदद करते हुए जाओ
मैं तन्हा मर न जाऊँ दो अदद करते हुए जाओ

चराग़ों की जलन से ख़त्म हो जाती है तारीक़ी
हसद करते हुए आओ हसद करते हुए जाओ

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ऐसी तारीकियाँ आँखों में बसी हैं कि 'फ़राज़'
रात तो रात है हम दिन को जलाते हैं चराग़

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तारीकियाँ हैं साथ मिरे और सफ़र मुदाम
कल तक था हम-क़दम जो फ़रिश्ता किधर गया

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तारीकी से जलता है दीवारें इस की हैं मुख़बिर
रात में साया एक दिए को तेल लगाके आया है

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घोर उदासी देखी है उन चेहरों ने
जिन चेहरों को सदियों तक मुस्काना था

दौड़ रहे थे आगे-पीछे जो साए
तारीकी में उन्हें तो मुर्शिद जाना था

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रफ़तार इतनी तेज़ थी सैलाब-ए-दर्द की
आँखों के बाँध तोड़ के आँसू निकल पड़े

फिर भी न आफ़ताब की गैरत को आया होश
तारीकियाँ मिटाने को जुगनू निकल पड़े

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तेरी यादों की तारीकी में जाँ
हम अपना दिल जलाया करते हैं

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किस को पता था मैं हूँ तारीकी-ए-मिज़ाज
किस ने दिए को ला के चौखट पे रख दिए

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चले जाओ मगर इतनी मदद करते हुए जाओ
मैं तन्हा मर न जाऊँ दो अदद करते हुए जाओ

चराग़ों की जलन से ख़त्म हो जाती है तारीक़ी
हसद करते हुए आओ हसद करते हुए जाओ

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मूल रूप में 'जाविदाँ' समय से परे किसी ऐसी चीज़ का विचार उत्पन्न करता है जो क्षणिक दुनिया के क्षय से अछूता है। कविता में, यह अक्सर प्रेम, सुंदरता या सत्य के शाश्वत स्वभाव का प्रतीक बन जाता है, जो क्षणभंगुरता के बीच अपरिवर्तित रहता है।

'जाविदाँ' का उपयोग कवि अक्सर भावनाओं या आदर्शों की कालातीतता व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह क्षणभंगुरता के विपरीत है, जो यह दर्शाता है कि जब सब कुछ मिट जाता है तो क्या बचा रहता है। यह आशा और निरंतरता का शब्द है।

'जाविदाँ' वास्तव में जो कालातीत है उसकी सार्थकता को पकड़ता है, कवियों को शाश्वत से जोड़ने का एक पुल प्रदान करता है।